पल दो पल की बात नहीं थी
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पल दो पल की बात नहीं थी

श्रेयांशी वर्मा फिर से देखना वाराणसी की वो दोपहर वैसी ही थी जैसी होती है—धूल भरी, … पल दो पल की बात नहीं थीRead more

मिर्ज़ापुर के पत्थर
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मिर्ज़ापुर के पत्थर

मयंक दुबे मिर्ज़ापुर की सुबहें शांत दिखती थीं, लेकिन ज़मीन के नीचे खदबदाता था कुछ ऐसा … मिर्ज़ापुर के पत्थरRead more

বালুচরের দিনগুলি
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বালুচরের দিনগুলি

মালবিকা সেনগুপ্ত   ঢাকার ধুলো-ধোঁয়া আর ট্র্যাফিকের চক্রব্যূহ পেরিয়ে যখন জয়িতা নামল মেঘনাঘাটের ছোট্ট ফেরিঘাটে, তখন … বালুচরের দিনগুলিRead more

उस रात जंतर मंतर पर
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उस रात जंतर मंतर पर

विराज देशमुख अध्याय १ दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस की सड़कें अगस्त की हल्की बारिश से … उस रात जंतर मंतर परRead more