हास्य कहानियाँ

  • मकान मालिक vs किरायेदार

    मकान मालिक vs किरायेदार

    चन्दन पांडेय १ पुराने मोहल्ले की गलियाँ वैसे ही तंग और भीड़भाड़ से भरी थीं, जैसे किसी इतिहास की किताब का पीला पड़ चुका पन्ना। मकान मालिक शर्मा जी का घर भी उन जर्जर दीवारों के बीच एक ऐसा ही मकान था, जिसकी छत से सीलन की गंध आती थी और दीवारों पर पिछली बरसात…

    read more

  • देसी जासूस एजेंसी

    देसी जासूस एजेंसी

    प्रभात कुमार वर्मा  १ पप्पू और गोलू की दोस्ती मोहल्ले में मशहूर थी। दोनों हमेशा साथ घूमते-फिरते, गली-गली की हर गप्प में मौजूद रहते और हर झगड़े में बीच-बचाव करने का मौका ढूँढते। लेकिन ज़िंदगी में कुछ बड़ा करने की उनकी ख्वाहिश अधूरी रह जाती थी। मोहल्ले की छत पर, गर्मियों की एक दुपहरी में,…

    read more

  • शर्मा जी का नया फोन

    शर्मा जी का नया फोन

    मयंक श्रीवास्तव दुकान से घर तक का सफ़र शर्मा जी वैसे तो बिल्कुल सीधेसादे इंसान थे, लेकिन मोहल्ले में उनकी पहचान एक ऐसे शख्स की थी जिन्हें हर समय नई-नई चीज़ों का शौक चढ़ा रहता था। कल तक जो बड़े गर्व से लोगों को बताते घूम रहे थे कि “भाईसाहब, मेरा कीपैड वाला फोन पाँच…

    read more

  • कांता बुआ की कन्याकुंभ यात्रा

    कांता बुआ की कन्याकुंभ यात्रा

    विपुल शर्मा भाग 1: बुआ का एलान बिल्लूपुर की सुबहें आमतौर पर कबूतरों की गुटरगूँ, चाय की पहली चुस्की, और दूधवाले की साइकिल की घंटी से शुरू होती थीं। लेकिन उस दिन की सुबह कुछ अलग थी। गाँव के मंदिर के सामने चौपाल में, नीम के नीचे बैठी कांता बुआ ने एक ज़ोरदार चाय की…

    read more

  • हनीमून का टूर गाइड

    हनीमून का टूर गाइड

    सुनील पाटिल राजेश और आर्टी की शादी हो चुकी थी, और अब वे अपनी शादी के बाद के हनीमून के लिए तैयार थे। दोनों ने एक शांत और सुरम्य हिल स्टेशन का चुनाव किया था, जो उनके दिलों के करीब था। हालांकि, राजेश को यात्रा की योजना बनाते वक्त कुछ उलझन थी, क्योंकि वह हमेशा…

    read more

  • दिलचस्प दफ़्तर

    दिलचस्प दफ़्तर

    विशाल कुमार बड़ा कागज संकट ऑफिस के माहौल में एक हलचल थी। Hopeful Hearts की छोटी सी टीम किसी न किसी वजह से हमेशा उधड़ी रहती थी। आज ऑफिस का एक नया दिन था, और जैसे ही अर्विंद, ऑफिस के मैनेजर, ने दरवाजा खोला, उसे एक चिठ्ठी मिली जो सीधे विनोद सर के केबिन से…

    read more

  • किश्तों में शादी

    किश्तों में शादी

    नरेश चतुर्वेदी पहला भाग: उधारी के सूट से शुरू हुआ रोमांस रमेश कुमार चौबे एक साधारण लेकिन महत्वाकांक्षी युवक था, जो इलाहाबाद की एक पुरानी किराये की कोठी में रहता था जहाँ दीवारों से पपड़ी गिरती थी और छत से कबूतर। लेकिन उसके सपनों की कोई सीमा नहीं थी। वह हर इतवार को बालों में…

    read more

  • पप्पू IAS बन गया!

    पप्पू IAS बन गया!

    देवांशु मिश्र छींकापुर, ऐसा गाँव जहाँ हर दूसरे दिन बिजली जाती है और हर चौथे दिन चौधरी जी की बकरी। यहाँ के लोग ताश खेलते हुए दुनिया की राजनीति तय करते हैं और बीड़ी पीते हुए शेयर मार्केट की चाल समझाते हैं। इसी गाँव का सबसे विशेष जीव था—पप्पू यादव। उम्र 28, काम-काज शून्य, मगर…

    read more

  • श्रीवास्तव जी की ऑनलाइन शॉपिंग

    श्रीवास्तव जी की ऑनलाइन शॉपिंग

    अयन त्रिपाठी श्रीवास्तव जी की सुबह हमेशा की तरह अख़बार और चाय से शुरू हुई, लेकिन आज कुछ अलग था। अख़बार पढ़ते-पढ़ते उनके कान में पाखी की आवाज़ पड़ी, जो अपने मोबाइल पर कुछ दिखा रही थी – “पापा, देखिए, ऑनलाइन में कितनी सेल लगी है!” पहले तो उन्होंने नज़रअंदाज़ किया, लेकिन जब बेटे चिराग…

    read more

  • चौथी मंज़िल वाले चमनलाल

    चौथी मंज़िल वाले चमनलाल

    रंजन मिश्रा भाग 1: व्हाट्सऐप वार “चमनलाल जी ने फिर ग्रुप पर पोस्ट कर दिया—’कल रात तीसरी मंज़िल से जो हड्डी गिराई गई थी, उससे मेरी गुलाब की क्यारी घायल हो गई है। मैं FIR दर्ज करवाने जा रहा हूँ। – चौथी मंज़िल, चमनलाल’।” कॉलोनी का ‘अप्टू कॉलोनी रेसिडेंट्स ग्रुप’ सुबह-सुबह सुलग उठा। एक ओर…

    read more

  • EMI का महा-भंवर

    EMI का महा-भंवर

    संजीव मिश्रा भाग 1: किशोरलाल की किस्त-कथा किशोरलाल गुप्ता, उम्र लगभग 43 साल, पेशे से एक मध्यम दर्जे का सेल्समैन, लेकिन दिल से बहुत बड़े सपने देखने वाला इंसान था। सपना—नई चमचमाती कार, फ्लैट में दो बाथरूम, और एक स्मार्ट टीवी जिसमें नेटफ्लिक्स चले बिना बफरिंग के। पर समस्या एक ही थी—पैसे। और तब उसके…

    read more

  • कवियों का महासंग्राम

    कवियों का महासंग्राम

    विनीत अवस्थी भाग 1: पंखे के नीचे कविता चिलचिलाती गर्मी में जनपद रामपुर के टाउन हॉल में कवि सम्मेलन की तैयारी अपने चरम पर थी। आयोजक श्री मुन्ना लाल ‘मुक्त’ जिनकी मूंछें खुद कविताओं की तरह ऊपर-नीचे लहराती थीं, पूरे उत्साह से व्यवस्था में लगे थे। पंखे खड़खड़ा रहे थे, माइक टेस्ट हो चुका था—”हैलो…हैलो…प्याज़…

    read more