नैतिक कहानियाँ

  • राशन कार्ड

    राशन कार्ड

    नीलाभ रंजन रात के आख़िरी पहर जब गाँव के ऊपर धुंध उतर रही थी, रामसेवक अपनी टूटी हुई चारपाई के पास बैठा पुराने लोहे के बक्से में कपड़े भर रहा था। घर के आँगन में मिट्टी का चूल्हा ठंडा पड़ा था। सुनीता चुपचाप बच्चों के फटे कपड़े तह कर रही थी। दोनों के बीच कोई…

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  • राख से रोशनी

    राख से रोशनी

    समीर चौहान भाग 1 — शुरुआत का सपना लखनऊ की पुरानी गलियों में सर्दी की धूप धीरे-धीरे उतर रही थी। आयुष वर्मा बालकनी में खड़े होकर चाय की भाप में खोया था। कप उसके हाथ में था, लेकिन दिमाग कहीं और। नौकरी में आज प्रमोशन मिला था, लेकिन दिल में कोई खुशी नहीं थी। दिल्ली…

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  • गाथा एक चम्मच की

    गाथा एक चम्मच की

    मधुश्री चौहान १ गाँव की सुबह में एक अलग ही सादगी होती है—न शोर, न भागदौड़, बस मिट्टी की खुशबू और जागते जीवन की धीमी गूंज। ऐसी ही एक सुबह, जब सूरज की हल्की किरणें आम के पेड़ों को छूती हुई धीरे-धीरे ज़मीन पर उतर रही थीं, राधा अपने कच्चे घर के सामने झुकी हुई…

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  • डब्बे के रास्ते

    डब्बे के रास्ते

    नवनीत विश्वास 1 हर सुबह जैसे मुंबई जागती है – गाड़ियों की आवाज़, लोकल ट्रेनों की घरघराहट, और भीड़ के कोलाहल में – उसी के साथ एक और दुनिया भी आँखें खोलती है: डब्बावालों की दुनिया। ये वो लोग हैं जो रोज़ लाखों लोगों के घर का खाना, सैकड़ों किलोमीटर दूर, बिना एक गलती के,…

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  • काम का कोई छोटा-बड़ा नहीं

    काम का कोई छोटा-बड़ा नहीं

    सोमा ठाकुर रोहित ने जैसे ही बी.ए. अंतिम वर्ष की परीक्षा पास की, एक अजीब सा आत्मविश्वास उसके भीतर भर गया था। वह एक छोटे शहर का सीधा-सादा लड़का था, लेकिन आंखों में बड़े सपने पलते थे—अपने दम पर कुछ बनना, परिवार की हालत सुधारना, और समाज में सम्मान अर्जित करना। उसके पिता, श्री मनोहर…

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  • सच्ची दौलत

    सच्ची दौलत

    राकेश मिश्र ऊँचे बर्फीले पर्वतों के बीच, जहाँ हवा में देवताओं की सांसें महसूस होती थीं, एक पुरानी पत्थर की गुफा थी — भीतर सन्नाटा, बाहर प्रकृति का मधुर संगीत। गुफा के भीतर विराजमान थे साधु बाबा, जिनका वास्तविक नाम किसी को नहीं मालूम था; सब उन्हें ‘बाबा’ कहकर ही बुलाते थे। वर्षों से इस…

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  • ईमानदारी का इनाम

    ईमानदारी का इनाम

    अरुण कुमार त्रिपाठि १ रामू का जीवन बिल्कुल वैसा था जैसा किसी सीधे-साधे किसान का होता है। वह उत्तर भारत के एक छोटे से गाँव धनपुर में अपने मिट्टी के छोटे-से घर में पत्नी गौरी और दो बच्चों — सोनू और मुनिया — के साथ रहता था। रामू की दिनचर्या सूरज निकलने से पहले शुरू…

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