फिक्शन कहानी

  • नवंबर की चाय

    नवंबर की चाय

    सुधांशु त्रिपाठी भाग 1 – पहली ठंडी सुबह नवंबर का महीना था। दिल्ली की सुबहें धीरे-धीरे धुंध के कपड़े ओढ़ने लगी थीं। पुरानी दिल्ली की सँकरी गलियाँ हों या नई दिल्ली की चौड़ी सड़कें, हर जगह ठंडी हवा का झोंका लोगों को अपनी ओढ़नी कसकर खींचने पर मजबूर कर देता। चौराहों पर, पार्क की बेंचों…

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  • एलाहाबाद की अड्डेबाज़ी

    एलाहाबाद की अड्डेबाज़ी

    आरव तिवारी भाग 1 – संगम किनारे की शुरुआत इलाहाबाद की शामें हमेशा से अनोखी रही हैं। जहाँ एक ओर संगम का किनारा अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से लोगों को आकर्षित करता है, वहीं दूसरी ओर सिविल लाइन्स और कटरा की गलियों में एक अलग ही ज़िंदगी धड़कती है। विश्वविद्यालय के सामने की चाय…

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  • राख से रोशनी

    राख से रोशनी

    समीर चौहान भाग 1 — शुरुआत का सपना लखनऊ की पुरानी गलियों में सर्दी की धूप धीरे-धीरे उतर रही थी। आयुष वर्मा बालकनी में खड़े होकर चाय की भाप में खोया था। कप उसके हाथ में था, लेकिन दिमाग कहीं और। नौकरी में आज प्रमोशन मिला था, लेकिन दिल में कोई खुशी नहीं थी। दिल्ली…

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  • डब्बे के रास्ते

    डब्बे के रास्ते

    नवनीत विश्वास 1 हर सुबह जैसे मुंबई जागती है – गाड़ियों की आवाज़, लोकल ट्रेनों की घरघराहट, और भीड़ के कोलाहल में – उसी के साथ एक और दुनिया भी आँखें खोलती है: डब्बावालों की दुनिया। ये वो लोग हैं जो रोज़ लाखों लोगों के घर का खाना, सैकड़ों किलोमीटर दूर, बिना एक गलती के,…

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  • सुनहरी मिठास

    सुनहरी मिठास

    सारिका शर्मा स्वादों का आगमन शहर की हलचल और तेज़ रफ्तार जीवन में एक तरह की थकान सी आ गई थी। लोग अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते, और शहर की गलियों में एक अजीब सा अकेलापन महसूस होता था। ऐसे में, आरण्य नामक युवक के लिए यह एक नई शुरुआत थी। वह एक सफल शेफ…

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  • सत्ता के साये में

    सत्ता के साये में

    कविता मेहरा भाग १ दिल्ली की सर्द सुबहें हमेशा कुछ छुपाए रखती हैं। कोहरे में लिपटी इमारतें, सड़क किनारे चाय की दुकानों से उठती भाप, और नेताओं की कारों के काफ़िले—इन सबके बीच कुछ ऐसा भी चलता है जो दिखाई नहीं देता, पर असर छोड़ता है। साउथ ब्लॉक के पीछे एक पुरानी बिल्डिंग है—’शंकर निवास’—जहाँ…

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  • सत्ता का जाल

    सत्ता का जाल

    विनय प्रताप सिंह भाग 1 लखनऊ की वह रात सर्द नहीं थी, लेकिन शहर के सियासी गलियारों में एक अजीब ठंडक फैल चुकी थी। विधानसभा के बाहर अचानक बिजली चली गई। पूरे परिसर में अंधेरा छा गया, जैसे किसी ने जानबूझकर समय को रोक दिया हो। मुख्यमंत्री यशवर्धन त्रिपाठी की कार का काफिला ज़रा देर…

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  • Seenzone में अटका प्यार

    Seenzone में अटका प्यार

    सिया वर्मा भाग 1: DM से Destiny तक “Poetry is dead, bro,” अर्जुन ने कहा और अपने लैपटॉप का स्क्रीन बंद कर दिया। “Then why are you still liking sad quotes at 2AM?” समृद्धि ने चुटकी ली और उसके हाथ से फोन छीन लिया। वो दोनों Instagram के एक ऑनलाइन पोएट्री लाइव सेशन पर मिले…

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  • धुंध में सिंहासन

    धुंध में सिंहासन

    अनिरुद्ध तिवारी भाग १: खामोशी की हलचल धरणपुर की सुबहें शांत होती थीं—कम से कम बाहर से देखने पर। लेकिन जो लोग सत्ता के गलियारों में रहते थे, उन्हें मालूम था कि यहां की चुप्पी अक्सर किसी तूफान से पहले की खामोशी होती है। चुनाव छह महीने दूर थे, पर मुख्यमंत्री सुरेश राजे का चेहरा…

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  • सिनेमा वाला सपना

    सिनेमा वाला सपना

    मिथिला शर्मा भाग 1: पहले शो का दीवाना पंकज को शहर के पुराने सिनेमाघर “रूपसागर टॉकीज” से बेहद प्यार था। वो वही सिनेमाघर था जहां उसकी पहली फिल्म लगी थी — शाहरुख खान की “कुछ कुछ होता है।” उम्र तब सिर्फ नौ साल थी, लेकिन उस दिन से जो रिश्ता बना परदे से, वो आज…

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  • छोटे शहर की बड़ी बातें

    छोटे शहर की बड़ी बातें

    अमित वर्मा भाग 1 मुरादाबाद का जून महीना हमेशा कुछ न कुछ लेकर आता था। कभी धूल भरी आंधी, कभी बिना मौसम के बादल और कभी एकदम अचानक बारिश। उस दिन भी ऐसा ही हुआ। मैं अपनी स्कूटी लेकर ऑफिस से लौट रहा था जब अचानक आसमान फट पड़ा। बारिश की बूंदें ऐसी गिर रही…

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