Hindi

  • रात की धुंध

    रात की धुंध

    विक्रम चतुर्वेदी दिल्ली की पुरानी गलियों में सर्दियों की रातें हमेशा से रहस्यमयी रही हैं, लेकिन उस रात की धुंध कुछ अलग थी—जैसे हवा में अजीब सी गंध घुली हो, जैसे पुरानी कहानियाँ अचानक फिर से ज़िंदा हो उठी हों। रात के करीब ढाई बज रहे थे जब पुरानी दिल्ली के एक तंग गली में…

    read more

  • साहसिक यात्रा: बर्फ़ीली राहों पर

    साहसिक यात्रा: बर्फ़ीली राहों पर

    दीपक मिश्रा विकास मुख़र्जी ने अपने जीवन में कई बार खुद को चुनौती दी थी, लेकिन अब वह एक नई, कठिन चुनौती का सामना करने जा रहा था। कोलकाता के एक हलचल भरे मोहल्ले से दूर, उसने चादर ट्रैक के बारे में सुना था—लद्दाख के जंस्कार क्षेत्र में स्थित एक बर्फीली नदी पर पैदल यात्रा।…

    read more

  • पल दो पल की बात नहीं थी

    पल दो पल की बात नहीं थी

    श्रेयांशी वर्मा फिर से देखना वाराणसी की वो दोपहर वैसी ही थी जैसी होती है—धूल भरी, हल्की धूप से चकाचौंध, और गंगा की तरफ बहते हवा के छोटे-छोटे झोंकों के साथ एक ठहराव लिए। घाटों के पास बैठा आरव त्रिपाठी, अपनी डायरी की खाली पन्नियों को ताक रहा था, मानो शब्द कहीं खो गए थे।…

    read more

  • मिर्ज़ापुर के पत्थर

    मिर्ज़ापुर के पत्थर

    मयंक दुबे मिर्ज़ापुर की सुबहें शांत दिखती थीं, लेकिन ज़मीन के नीचे खदबदाता था कुछ ऐसा जो इंसानी आंखों से नहीं दिखता था। उस दिन भी सूरज वैसा ही उगा था—रंगीन, गर्म और निर्दोष, जैसे खदान के पास के गाँवों में हर सुबह उगता है। लेकिन खदान नंबर-17 में काम कर रहे मजदूरों की चीखों…

    read more

  • रक्त कमल

    रक्त कमल

    मालविका नायर १ समुद्र की लहरों की निरंतर गूंज और उस पर खड़ा बेकल किला — केरल की सबसे प्राचीन और रहस्यमयी किलों में से एक, जहाँ इतिहास केवल पत्थरों पर नहीं, हवाओं में दर्ज है। जान्हवी शर्मा की नजरों में ये किला सिर्फ एक वास्तुकला नहीं था, बल्कि एक अदृश्य आवाज़ थी जो सदियों…

    read more

  • उस रात जंतर मंतर पर

    उस रात जंतर मंतर पर

    विराज देशमुख अध्याय १ दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस की सड़कें अगस्त की हल्की बारिश से चमक रही थीं। पेड़ों की पत्तियाँ भीग चुकी थीं, और हॉस्टल के गलियारों में एक नई उमंग घुली हुई थी—नए सेमेस्टर की, नई क्लासेस की, और हाँ, नए चेहरों की भी। आर्ट्स फैकल्टी के बाहर एक छोटा-सा जमावड़ा था,…

    read more

  • गाथा एक चम्मच की

    गाथा एक चम्मच की

    मधुश्री चौहान १ गाँव की सुबह में एक अलग ही सादगी होती है—न शोर, न भागदौड़, बस मिट्टी की खुशबू और जागते जीवन की धीमी गूंज। ऐसी ही एक सुबह, जब सूरज की हल्की किरणें आम के पेड़ों को छूती हुई धीरे-धीरे ज़मीन पर उतर रही थीं, राधा अपने कच्चे घर के सामने झुकी हुई…

    read more

  • आत्म-खोज का सफर

    आत्म-खोज का सफर

    शिवानी कश्यप इशा रेड्डी अपने मुंबई स्थित उच्च-मूल्य वाले फ्लैट की खिड़की से बाहर देख रही थी, जहाँ से शहर का विस्तृत आकाश नजर आता था। कभी इस शहर ने उसे अपने सपनों के रंग दिए थे, लेकिन अब यह शहर उसे एक बंद पिंजरे जैसा महसूस होने लगा था। वाहनों का शोर, लोगों की…

    read more

  • कुमाऊँ की हवाएँ

    कुमाऊँ की हवाएँ

    सान्या जोशी अदिति कपूर की ज़िन्दगी एक दौड़ बन चुकी थी। दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर उसके कदम तेज़ थे, और उसकी आँखें हमेशा किसी न किसी लक्ष्य की ओर दौड़ती रहती थीं। एक सफल कॉर्पोरेट पेशेवर, 28 वर्षीय अदिति ने शहर की तेज़-तर्रार दुनिया में अपने कदम जमा लिए थे। मगर, अब यह सब…

    read more

  • नींद का इंजेक्शन

    नींद का इंजेक्शन

    संध्या जोशी १ रात के ढाई बजे थे। मुंबई की हवा में उमस थी, लेकिन सिटी केयर अस्पताल की ICU यूनिट में एसी की ठंडक के बीच सब कुछ शांत था—कम से कम सतह पर। अंदर गहराई में कुछ हिल रहा था। ICU नंबर 3 में 52 वर्षीय व्यवसायी राजीव भाटिया की एपेंडिक्स सर्जरी खत्म…

    read more

  • अंतिम आरती

    अंतिम आरती

    हिमाचल की घाटियों में दिसंबर की रातें कुछ अलग ही किस्म की सन्नाटे से भरी होती हैं। हवा में बर्फ़ की गंध, पेड़ों पर जमीं सफेद चादर, और दूर कहीं से आती घंटियों की हल्की गूंज जैसे समय को रोक देती है। उन्हीं घाटियों में, देवदार के पेड़ों से घिरे एक पहाड़ी ढलान पर खड़ा…

    read more

  • तेरा इंतज़ार

    तेरा इंतज़ार

    नवनीत तनेजा अध्याय १: “ख़ामोश दिल की रातें” रेडियो स्टेशन की हल्की पीली रौशनी में बैठी सिया राय ने अपने सामने रखे माइक की ओर देखा। रात के दस बजने ही वाले थे, और वो पल आने वाला था जब उसकी आवाज़ शहर की अनगिनत खिड़कियों से होकर उन लोगों तक पहुँचेगी जो तन्हा हैं,…

    read more