Hindi
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डब्बे के रास्ते
नवनीत विश्वास 1 हर सुबह जैसे मुंबई जागती है – गाड़ियों की आवाज़, लोकल ट्रेनों की घरघराहट, और भीड़ के कोलाहल में – उसी के साथ एक और दुनिया भी आँखें खोलती है: डब्बावालों की दुनिया। ये वो लोग हैं जो रोज़ लाखों लोगों के घर का खाना, सैकड़ों किलोमीटर दूर, बिना एक गलती के,…
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अंधे कुएं की पुकार
विराज कुलकर्णी १ उत्तर भारत के एक सुदूर गाँव में जब सरकारी जीप धूल उड़ाती हुई दाखिल हुई, तो सूरज अपनी नारंगी किरणें खेतों की मेड़ों पर बिखेर रहा था। गाँव का नाम ‘गहना’ था — और सच में, यह गाँव घने सन्नाटे से ढका हुआ था। डॉ. अदिति वर्मा खिड़की से बाहर झाँकती रही;…
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सुनहरी मिठास
सारिका शर्मा स्वादों का आगमन शहर की हलचल और तेज़ रफ्तार जीवन में एक तरह की थकान सी आ गई थी। लोग अपनी-अपनी दुनिया में खोए रहते, और शहर की गलियों में एक अजीब सा अकेलापन महसूस होता था। ऐसे में, आरण्य नामक युवक के लिए यह एक नई शुरुआत थी। वह एक सफल शेफ…
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माटी में दफन राज
अमिताभ वर्मा १ बघेलपुर गाँव की दोपहरें अक्सर आलस से भरी होती थीं, लेकिन उस दिन हवेली की मिट्टी में जो निकला, उसने पूरे गाँव को एक अनकहे सन्नाटे में डुबो दिया। ठाकुर हवेली, जो पिछले चालीस सालों से वीरान पड़ी थी, अब नई खरीददारी के बाद मरम्मत के लिए खुली थी। मजदूरों का दल…
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आदर्श और अवसर
सुमन यादव एक कामल गाँव के बडे़ बरगद के पेड़ के नीचे खड़ा था, उसका मन बहुत दूर कहीं था, न कि उस थकाऊ खेत के काम में जो उसे घर जाकर करना था। वह बाकी लड़कों की तरह नहीं था, जो जमीन जोतने, फसल काटने या अपने पिता की मदद करने में संतुष्ट होते…
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कांच सा दिल
कविता राठौर दिल्ली विश्वविद्यालय की उस पुरानी लाइब्रेरी में जैसे समय ठहर गया था। दीवारों पर किताबों की महक और खिड़की से आती धूप की एक पतली परत उन पन्नों पर गिरती, जिनमें जाने कितनी कहानियाँ कैद थीं। आरव वहाँ रोज़ आता था—शायद किताबों से ज़्यादा खामोशी से मिलने। लेकिन उस दिन सब कुछ बदल…
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हनीमून का टूर गाइड
सुनील पाटिल राजेश और आर्टी की शादी हो चुकी थी, और अब वे अपनी शादी के बाद के हनीमून के लिए तैयार थे। दोनों ने एक शांत और सुरम्य हिल स्टेशन का चुनाव किया था, जो उनके दिलों के करीब था। हालांकि, राजेश को यात्रा की योजना बनाते वक्त कुछ उलझन थी, क्योंकि वह हमेशा…
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भूतिया तिजोरी
शुभदीप मिश्र वाराणसी स्टेशन की गर्म हवा में अजीब-सी गंध थी—कुछ धूप की, कुछ पुराने लोहे की, और कुछ जैसे समय की। शौर्य व्यास ने अपने ट्रॉली बैग का हत्था कसकर पकड़ा और भीड़ को चीरते हुए बाहर निकला। सालों बाद भारत लौटना उसे उतना अजनबी नहीं लगा, जितना लगा व्यास निवास का नाम सुनते…
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ऑपरेशन: शिवलिंग
शशांक त्रिवेदी १ कश्मीर की पहाड़ियों में दिसंबर की कड़ाके की ठंड बर्फ के परदे की तरह चारों ओर फैली थी। गुलमर्ग के निकट, बर्फ से ढके एक निर्जन घाटी में सेना की एक स्पेशल यूनिट गश्त पर थी—नेतृत्व कर रहे थे मेजर शौर्य व्यास, जो अपनी दृढ़ निगाहों और अचूक निर्णयों के लिए जाने…
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काले धब्बे
रश्मि वर्मा शालिनी वर्मा के कदम जैसे ही मुंबई की गलियों में पड़े, उसके मन में एक अजीब सा घबराहट का अहसास था। कई सालों बाद वह इस शहर में वापस आई थी, और यह शहर अब पहले जैसा नहीं था। न जाने कितनी बार उसने यहाँ की सड़कों पर चलते हुए अपने बचपन और…
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पंचम गली की आत्मा
नवनीत मिश्रा बनारस के घाटों से दूर, पुराने शहर के भीतर एक मुड़ी-तुड़ी सी गलियों की भूलभुलैया में बसी थी पंचम गली — एक ऐसी जगह जो शहर के नक्शे में शायद दर्ज भी न हो, पर लोगों की यादों में सदी भर की कहानियाँ समेटे जीवित थी। यहीं पोस्टिंग हुई थी सब-इंस्पेक्टर अर्पित चौधरी…












