• Hindi - रहस्य कहानियाँ

    अंधेरे की परछाइयाँ

    विवेक यादव १ दिल्ली की हल्की सर्दियों की उस सुबह अर्जुन सिंह की आंखें अलार्म घड़ी की कानफाड़ू आवाज़ से खुलीं, पर दिलो-दिमाग में जो बेचैनी थी, वह किसी अलार्म से नहीं जागी थी। अपने छोटे से किराये के फ्लैट में अर्जुन ने दीवार पर टंगी घड़ी की ओर देखा—सुबह के सात बजने वाले थे। बाहर से दूधवाले की साइकिल की घंटी, अखबार के लड़के की पुकार और पड़ोसी की चाय के प्याले की खनक सुनाई दे रही थी, मगर अर्जुन का मन इन साधारण आवाजों से परे किसी और ही दुनिया में भटक रहा था। वो दुनिया, जो सपनों…

  • Hindi - Romance

    ख्वाबों की गली

    नीता देव अध्याय 1: रंगों की चुप्पी झाँसी की गलियों में सुबह की पहली किरण जब पुराने किलों की दीवारों से टकराकर उतरती थी, तब शहर में एक धीमी-सी हलचल शुरू होती थी। पर उस हलचल से दूर, एक छोटी-सी गली में, पुराने नीले दरवाज़े के पीछे राधा अपनी दुनिया में खोई हुई बैठी थी। लकड़ी की खड़खड़ाती खिड़की से छनकर आती धूप उसकी आधी-अधूरी पेंटिंग पर पड़ रही थी, जिसमें एक लड़की एक खिड़की के भीतर बैठी आकाश को देख रही थी—कुछ वैसा ही जैसे खुद राधा थी। कलाई तक रंगों में सनी हुई, वह ब्रश को बहुत नर्मता…

  • Hindi - प्रेम कहानियाँ

    तुम्हारे बिना भी तुमसे

    अनामिका जोशी 1 शाम की हवा में अजीब सी उदासी थी, जैसे दिन अपने पैरों के निशान समेट रहा हो। दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन पर मयंक एक बेंच पर बैठा था, अपने नीले डफल बैग के ऊपर कोहनी टिकाए, और दूसरी ओर एक किताब पकड़े—”Norwegian Wood”। कानों में ईयरफोन, लेकिन कोई गाना नहीं चल रहा था। बस, शोर से खुद को काटने की एक कोशिश थी। उसे ट्रेन पकड़नी थी—जयपुर जाने वाली इंटरसिटी। पहली नौकरी, पहली पोस्टिंग, और पहली बार दिल्ली छोड़ना। भीतर कुछ हल्का सा डर भी था और थोड़ा गर्व भी। आसपास लोग भागदौड़ कर रहे थे,…

  • Hindi - हास्य कहानियाँ

    कवियों का महासंग्राम

    विनीत अवस्थी भाग 1: पंखे के नीचे कविता चिलचिलाती गर्मी में जनपद रामपुर के टाउन हॉल में कवि सम्मेलन की तैयारी अपने चरम पर थी। आयोजक श्री मुन्ना लाल ‘मुक्त’ जिनकी मूंछें खुद कविताओं की तरह ऊपर-नीचे लहराती थीं, पूरे उत्साह से व्यवस्था में लगे थे। पंखे खड़खड़ा रहे थे, माइक टेस्ट हो चुका था—”हैलो…हैलो…प्याज़ 60 रुपये किलो…”—और कुर्सियाँ ठीक वैसे ही डगमगा रही थीं जैसे देश के बजट पर विश्वास। शाम सात बजे पहला कवि मंच पर चढ़ा: श्री रमेश कुमार ‘रसिया’, जिनकी खासियत थी रोमांटिक कविताएं सुनाकर सामने बैठी आंटियों को ब्लश करवा देना। उन्होंने मंच पर आते…

  • Hindi - प्रेम कहानियाँ

    सिगरेट के धुएं में एक अधूरी कविता

    अन्वी शुक्ला बंद कमरा और अधूरी कविता इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हिंदी विभाग, समय की परतों से ढका हुआ, उन इमारतों में से एक था जहाँ दीवारें भी शेर सुनाती थीं। पुराने बरामदे, लोहे के गेट, और बरगद के नीचे लगे बेंच — सबमें कोई ना कोई दास्तान अटकी हुई थी। प्रोफेसर यतीन भटनागर, जिन्हें सब आदर से ‘यतीन सर’ कहते थे, हर दिन सुबह नौ बजे ठीक उसी बेंच पर बैठकर अपनी चाय पीते, मानो वक़्त को अपनी हथेली में थामे बैठे हों। उस दिन भी कुछ अलग नहीं था, सिवाय इसके कि हवा में कुछ अजीब था—जैसे कोई धुआँ……

  • Hindi - नैतिक कहानियाँ

    काम का कोई छोटा-बड़ा नहीं

    सोमा ठाकुर रोहित ने जैसे ही बी.ए. अंतिम वर्ष की परीक्षा पास की, एक अजीब सा आत्मविश्वास उसके भीतर भर गया था। वह एक छोटे शहर का सीधा-सादा लड़का था, लेकिन आंखों में बड़े सपने पलते थे—अपने दम पर कुछ बनना, परिवार की हालत सुधारना, और समाज में सम्मान अर्जित करना। उसके पिता, श्री मनोहर लाल शर्मा, एक सेवानिवृत्त क्लर्क थे, जिनकी पेंशन से जैसे-तैसे घर चलता था। मां गृहिणी थीं और एक छोटी बहन कॉलेज में पढ़ रही थी। रोहित हमेशा से पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन साधनों की कमी और प्रतियोगी माहौल ने उसे भीड़ का हिस्सा बना…

  • Hindi - क्राइम कहानियाँ

    रेड लिपस्टिक और एक राज़

    श्रुति चौहान भाग 1: चेहरा जो पहचाना सा था “नेहा, अगला क्लाइंट आया है,” रिया की असिस्टेंट ने धीरे से कहा। नेहा माथे पर हल्की लटों को पीछे सरकाते हुए ब्रश को मेज पर रखा। बड़ी स्क्रीन पर चेहरा फोकस करते-করते वो थक चुकी थी, लेकिन हर दिन की तरह, आज भी मेकअप उसका ध्यान बँटा देता था। वो चेहरे पढ़ सकती थी—रंग, बनावट, और सबसे अहम—उनमें छुपे भाव। “नाम?” नेहा ने पूछा। “सिया,” असिस्टेंट बोली। नाम सुनते ही उसके हाथ की मसल हल्का सा कांप गई। उसने अनदेखा किया। सिया—कितना आम सा नाम है। लेकिन क्या हर आम नाम…

  • Hindi - प्रेम कहानियाँ

    चाय की टपरी वाला प्यार

    राजीव कुमार शर्मा १ पुणे की सर्द सुबहें किसी पुराने गीत की तरह होती हैं—धीमी, धुंधभरी और मन को छू जाने वाली। नवंबर का महीना था, और हवा में एक अलग ही तरह की ठंडक थी जो कॉफी के मग या मोटी जैकेट से नहीं, किसी सच्चे अपने के पास बैठने से ही दूर हो सकती थी। सिम्मी कपूर अपने फ्लैट से रोज़ की तरह सुबह ८:०० बजे निकली। एक हाथ में ऑफिस बैग, दूसरे हाथ में फोन और कान में ईयरफोन—एक कॉर्पोरेट जिंदगी की सटीक तस्वीर। लेकिन उसके इस तेज़ चलने वाले दिन की शुरुआत होती थी एक बेहद…

  • Hindi - फिक्शन कहानी

    सत्ता का जाल

    विनय प्रताप सिंह भाग 1 लखनऊ की वह रात सर्द नहीं थी, लेकिन शहर के सियासी गलियारों में एक अजीब ठंडक फैल चुकी थी। विधानसभा के बाहर अचानक बिजली चली गई। पूरे परिसर में अंधेरा छा गया, जैसे किसी ने जानबूझकर समय को रोक दिया हो। मुख्यमंत्री यशवर्धन त्रिपाठी की कार का काफिला ज़रा देर के लिए ठिठका, फिर सुरक्षा की तैनाती दोगुनी कर दी गई। मुख्यमंत्री का चेहरा भावहीन था, पर उनके माथे पर पहली बार चिंता की महीन लकीरें उभरी थीं। उसी समय सचिवालय की चौथी मंज़िल से एक छोटी सी फाइल ग़ायब हो गई। उसका नाम था—ऑपरेशन…

  • Hindi - फिक्शन कहानी

    Seenzone में अटका प्यार

    सिया वर्मा भाग 1: DM से Destiny तक “Poetry is dead, bro,” अर्जुन ने कहा और अपने लैपटॉप का स्क्रीन बंद कर दिया। “Then why are you still liking sad quotes at 2AM?” समृद्धि ने चुटकी ली और उसके हाथ से फोन छीन लिया। वो दोनों Instagram के एक ऑनलाइन पोएट्री लाइव सेशन पर मिले थे—एक accidental like ने चैट की शुरुआत करवाई थी। समृद्धि, Delhi University की final year की student थी, psychology major, और poems लिखने का जुनून उसकी insomnia की सबसे प्यारी दोस्त बन चुका था। आर्यन, एक Mumbai वाला introvert था, जो ज़्यादा बोलता नहीं था…