विशाल सुरि गंगा की लहरों में आरण, दिल्ली का एक युवा लेखक, हमेशा से ही अपनी … बनारस की गलियों में प्यारRead more
प्रेम कहानियाँ
धूप के टुकड़े
अन्वेषा सिन्हा १ निहारिका की दुनिया बहुत सीमित थी—एक पुराना, ऊँची छतওয়ाला कमरा जिसमें मोटे-मोटे परदे … धूप के टुकड़ेRead more
दिल का रास्ता
स्मिता कपूर करण एक सफल वकील था, जो हमेशा तर्क और क़ानून के आधार पर अपनी … दिल का रास्ताRead more
समंदर के किनारे इश्क
कविता प्रधान मुंबई की बारिश किसी पुराने फ़िल्मी गीत की तरह होती है — धीमी, भीगी, … समंदर के किनारे इश्कRead more
छत की मोगरी
आयुषी राठौर भाग 1: आवाज़ों के बीच “धड़-धड़-धड़-धड़।” नवीन त्रिपाठी की सुबह की पढ़ाई का राग … छत की मोगरीRead more
कुरकुरे और कविता
अभिराज गुप्ता भोपाल की कोचिंग स्ट्रीट पर शाम ढलते ही भीड़ उमड़ने लगती है। सड़क के … कुरकुरे और कविताRead more
उस रात जब चाँद मुस्कुराया
वेदिका शर्मा बमुश्किल शाम के साढ़े सात बजे होंगे जब आयरा सेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन … उस रात जब चाँद मुस्कुरायाRead more
वापसी की राह
अनिकेत तिवारी सुबह की भीड़भाड़ भरी दिल्ली, उसकी चिल्ल-पों और भागती ज़िंदगी की आवाज़ें जब भी … वापसी की राहRead more
संगीत के उस पार
आकाश वर्मा १ मुंबई की बारिशें जैसे पूरे शहर को धो डालती थीं, वैसे ही कभी-कभी … संगीत के उस पारRead more
दिल्ली मेट्रो का मुसाफिर
मिताली गुप्ता १ दिल्ली की सुबहें कुछ अलग नहीं होतीं — ट्रैफिक का शोर, भागती हुई … दिल्ली मेट्रो का मुसाफिरRead more
ক্যালেন্ডারের বাইরের দিনগুলো
তিস্তা বন্দ্যোপাধ্যায় পর্ব ১: প্রথম ইমেল সকালটা শুরু হয়েছিল একেবারে নির্লিপ্তভাবে। স্নান, ব্রেকফাস্ট, মেট্রো, আর তারপর … ক্যালেন্ডারের বাইরের দিনগুলোRead more
तुम्हारे बिना भी तुमसे
अनामिका जोशी 1 शाम की हवा में अजीब सी उदासी थी, जैसे दिन अपने पैरों के … तुम्हारे बिना भी तुमसेRead more

