• Hindi - प्रेतकथा

    शापित हवेली

    कविता राठौड़ भाग १: हवेली के द्वार पर अद्वैता के हाथ में कैमरा और बैग था, और दिल में एक अजीब सी उत्सुकता। दिल्ली विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर थी वो—थीसिस का विषय था: “राजस्थान की लोककथाओं में भूत–प्रेत की उपस्थिति और उसका सामाजिक प्रभाव“। इस सिलसिले में वह पहुँची थी झुंझुनूं जिले के पास बसे एक छोटे से गाँव—आकनपुर। इस गाँव के बाहरी छोर पर स्थित थी—वो काली, विशाल, वीरान ठाकुर हवेली, जहाँ पिछली आधी सदी से कोई नहीं रहता। पर जहां हर रात दीयों की रौशनी और किसी औरत के रोने की आवाज़ आती थी—ऐसा गाँव वाले कहते थे।…

  • Hindi - क्राइम कहानियाँ

    सफेद कोट का खून

    राहुल भार्गव अध्याय 1: मौत ऑपरेशन थिएटर में सुबह के सात बजे का वक्त था, जब शहर के मशहूर नवरत्न मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल की दीवारें अपने अंदर एक गहरा रहस्य समेटे खामोश खड़ी थीं। अस्पताल की कांच की दीवारों से धूप की हल्की किरणें भीतर झांक रही थीं, लेकिन उनकी चमक अस्पताल के स्टाफ की घबराहट के सामने फीकी पड़ गई थी। ऑपरेशन थिएटर नंबर तीन के दरवाजे के बाहर नर्सें, जूनियर डॉक्टर्स और वार्ड बॉय जमा थे, जिनकी आंखों में डर और हैरानी दोनों थे। भीतर से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी, लेकिन दरवाजे के निचले हिस्से से खून…

  • Hindi - यात्रा-वृत्तांत

    लौटते कदम

    प्रणव शुक्ला दिल्ली की वो सर्द रात थी, जब शहर की इमारतें किसी नीरव कैदखाने जैसी लगती थीं। सड़कें रोशनी से जगमगा रही थीं, लेकिन उस रोशनी में भी अजीब-सा अंधकार फैला था — ऐसा अंधकार, जो दिल को चीरता चला जाए। आर्यन अपने ऑफिस की 25वीं मंज़िल की खिड़की से उस शहर को निहार रहा था, जो कभी उसके सपनों का हिस्सा था, और अब उसे सपनों का कफन जैसा लगने लगा था। एयरपोर्ट रोड की गाड़ियाँ, मेट्रो की गड़गड़ाहट, और दूर-दूर तक दिखती गगनचुंबी इमारतें — सब जैसे उसकी आत्मा पर बोझ बन गई थीं। दिन भर की…

  • Hindi - सामाजिक कहानियाँ

    छांव सी दोस्ती

    अनामिका मिश्रा भाग 1 गाँव का नाम था चांदपुर—उत्तरप्रदेश के बलिया जिले में बसा एक ऐसा गाँव, जहाँ न तो शहर की चकाचौंध थी, न ही इंटरनेट की तेज़ रफ्तार। लेकिन था तो बस एक चीज़—दिल से जुड़ा अपनापन। वही अपनापन था जो आरती और फरज़ाना की दोस्ती की नींव बना। आरती थी ज़मींदार के घर की इकलौती बेटी—चमकती साड़ी, पायल की छनक, और आँखों में अनगिनत सपने। दूसरी तरफ फरज़ाना—मदरसे में पढ़ाई करती, अब्बू की छोटी सी दुकान में हाथ बंटाती, चुपचाप मगर गहरी नज़रों वाली लड़की। दोनों का मिलना शायद किसी फिल्मी कहानी की तरह हुआ था, लेकिन…

  • Hindi - प्रेम कहानियाँ

    चाय और वो पुराना स्टेशन

    नीलेश राघव स्टेशन वही था—प्लेटफॉर्म नंबर तीन, पुरानी लकड़ी की बेंच, जंग खाया पीला बोर्ड, और सामने वही चायवाला, जो कभी मेरी कॉलेज की सुबहों की शुरुआत करता था। अब भी वो पुराने केतली में चाय उबाल रहा था, जैसे वक्त ने उसे छुआ तक नहीं। मैंने पास जाकर कहा, “तू अभी भी यहाँ चाय बेचता है?” वो चौंक गया, फिर मुस्कराया, “अरे भैया… नीलेश भैया ना? आप तो… कितना साल हो गया आपको देखे हुए!” “बीस,” मैंने कहा, “करीब बीस साल।” उसने सिर हिलाया, “पर चाय वही है। पीजिएगा?” मैंने पाँच का सिक्का बढ़ा दिया। उसने कुल्हड़ में चाय…

  • Hindi - प्रेम कहानियाँ

    धड़कनों की दरमियाँ

    नीरज सहाय भाग 1 सुबह की ठंडी हवा में हल्की-हल्की धुंध तैर रही थी। दिल्ली के पुरानी रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर तीन अपनी चिर-परिचित हलचल में डूबा था। चायवालों की आवाज़, कुलियों की पुकार, और यात्रियों की चहल-पहल के बीच एक कोना ऐसा था जहाँ समय जैसे कुछ देर के लिए ठहर जाता था — वही पुरानी किताबों की दुकान, जिसकी लकड़ी की अलमारी में से स्याही और पुराने कागज़ की मिली-जुली खुशबू आती थी। अर्जुन वहीं खड़ा था, अपनी आदत के मुताबिक। हर शुक्रवार की सुबह, ठीक दस बजे, वो वहाँ आता और कोई न कोई किताब खरीदकर…

  • Hindi - क्राइम कहानियाँ

    अधूरी गवाही

    नीरजा राजन अध्याय 1: मौत की खबर लखनऊ की जनवरी की उस ठंडी सुबह में सूरज की किरनें भी किसी अनकहे संकोच के साथ ज़मीन पर उतर रही थीं, जैसे उन्हें भी शहर की हवा में पसरे भारीपन का अंदाज़ा हो। हज़रतगंज के उस पॉश अपार्टमेंट “रॉयल हाइट्स” की चौथी मंज़िल पर हलचल मच चुकी थी। नीली साड़ी में लिपटी हुई नैना सक्सेना की निर्जीव देह बालकनी के रेलिंग से नीचे लॉन में पड़ी थी—एक खामोश चीख की तरह। चारों तरफ पुलिस की बैरिकेडिंग, मीडिया की भीड़, और मोबाइल कैमरों की चमक थी; पर हर किसी के भीतर एक ही…

  • Hindi - प्रेतकथा

    काले पानी की हवेली

    रथिन गुप्ता  अंधविश्वास की धरती लखनऊ की हलचल भरी गलियों और चमकती सड़कों से निकलते समय पावन त्रिपाठी के दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी। पत्रकारिता और ब्लॉगिंग की दुनिया में वह नाम तो कमा चुका था, लेकिन उसकी आत्मा को हमेशा कुछ अनछुए रहस्यों की तलाश रहती थी, जो लोगों की जुबां पर किस्सों की शक्ल में ज़िंदा होते हैं, लेकिन जिनकी सच्चाई किसी ने जानने की हिम्मत नहीं की। उसके हाथ में उसकी नोटबुक थी, जिस पर लिखा था – “काले पानी की हवेली – एक अनकही दास्तान”। उसने कई रातें इस हवेली के बारे में पढ़ने,…

  • Hindi - फिक्शन कहानी

    धुंध में सिंहासन

    अनिरुद्ध तिवारी भाग १: खामोशी की हलचल धरणपुर की सुबहें शांत होती थीं—कम से कम बाहर से देखने पर। लेकिन जो लोग सत्ता के गलियारों में रहते थे, उन्हें मालूम था कि यहां की चुप्पी अक्सर किसी तूफान से पहले की खामोशी होती है। चुनाव छह महीने दूर थे, पर मुख्यमंत्री सुरेश राजे का चेहरा जैसे पहले ही हार मान चुका था। काले घेरे उनकी आंखों के नीचे गहराते जा रहे थे और पार्टी के भीतर बगावत की आवाज़ें तेज़ होने लगी थीं। इसी बीच धरणपुर के जिला कलेक्टर राघव त्रिपाठी को एक गुप्त चिट्ठी मिली। सफेद लिफाफा, बिना किसी…

  • Hindi - क्राइम कहानियाँ

    मौन गवाह

    नितीन द्विवेदी १ प्रयागराज की सर्द सुबह थी। कुहासा गंगा किनारे के घाटों पर पसरा हुआ था। पुराने शहर के मोहल्ले में एक वीरान हवेली खामोशी ओढ़े खड़ी थी—’प्रकाश निवास’, जहाँ न्यायमूर्ति वेद प्रकाश अकेले रहते थे। बाहर एक नीली रंग की एंबेसेडर कार धूल से ढकी हुई थी, मानो वर्षों से चली नहीं हो। हवेली की जालीदार खिड़कियों से धूप झांकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उस सुबह हवेली के भीतर कुछ और ही घट चुका था। नौकर मुंशी बाबू, जो हर रोज़ सात बजे चाय लेकर ऊपर की मंज़िल पर जाया करते थे, आज दरवाज़ा खटखटाते ही…