• Hindi - Horror

    भूतहिया कुआँ

    अनामिका चौधरी पटना यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में उस दिन कुछ अजीब सा सन्नाटा था। रीतू ने अपनी डायरी में अंतिम लाइन लिखी—“लोककथाओं में सिर्फ डर नहीं होता, इतिहास भी छिपा होता है।” उसे अगले सप्ताह फील्ड वर्क के लिए सुभाषपुर जाना था—बिहार के बरौनी ज़िले का एक छोटा-सा गाँव, जहाँ आज़ादी से पहले के ज़मींदारों की हवेलियाँ अब खंडहर बन चुकी थीं। लेकिन उसका असली मकसद था—“भूतहिया कुआँ”। उस कुएँ की कथा सुनकर ही उसका रिसर्च टॉपिक तय हुआ था। कहा जाता था कि हर साल सावन की पहली अमावस्या की रात, उस सूखे कुएँ से एक औरत की कराह…

  • Hindi - कल्पविज्ञान

    पृथ्वी 2.0

    राजेश कुमार दास 2094 की वह शाम बाकी शामों से अलग थी। सूरज का अस्तित्व अब प्रतीकात्मक रह गया था—आकाश में केवल राखी धुंध थी और हवा में जलती हुई धातु की गंध। गंगा के घाट सूख चुके थे, हिमालय की बर्फ पिघल चुकी थी, और समुद्रों ने अपनी सीमाएँ लांघ दी थीं। भारत समेत सम्पूर्ण पृथ्वी अब जीवन के योग्य नहीं रही थी। वैश्विक वैज्ञानिक परिषदों, जलवायु आयोगों और पृथ्वी बचाओ संगठनों ने वर्षों तक चेतावनी दी थी, लेकिन देर हो चुकी थी। अब एक ही विकल्प बचा था—पृथ्वी 2.0। भारत ने “सम्भव-1” नामक इंटरप्लैनेटरी मिशन की योजना वर्षों…

  • Hindi - फिक्शन कहानी

    सत्ता के साये में

    कविता मेहरा भाग १ दिल्ली की सर्द सुबहें हमेशा कुछ छुपाए रखती हैं। कोहरे में लिपटी इमारतें, सड़क किनारे चाय की दुकानों से उठती भाप, और नेताओं की कारों के काफ़िले—इन सबके बीच कुछ ऐसा भी चलता है जो दिखाई नहीं देता, पर असर छोड़ता है। साउथ ब्लॉक के पीछे एक पुरानी बिल्डिंग है—’शंकर निवास’—जहाँ कभी एक मंत्री का परिवार रहता था, पर अब वहाँ रहस्यों की परछाइयाँ घूमती हैं। नेहा वर्मा, एक तेज़-तर्रार पत्रकार, ‘नव भारत आज’ चैनल की इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर है। ३२ साल की नेहा राजनीति की गलियों में सच खोजने की आदी हो चुकी थी। उसका काम…

  • Hindi - क्राइम कहानियाँ

    १३ वीं मंज़िल

    सम्वित शर्मा अध्याय १: एक और गिरावट बारिश की एक भारी रात थी, जब मुंबई की गगनचुंबी इमारत ‘ओशन व्यू हाइट्स’ के नीचे पुलिस की गाड़ियाँ जमा हो गईं। चारों तरफ नीली-लाल बत्तियों की झिलमिलाहट में भीगते हुए कुछ लोग भीड़ बनाकर खड़े थे, और बीच में एक पीले प्लास्टिक की शीट से ढका शव—एक और मौत। सेक्योरिटी गार्ड ने सबसे पहले देखा था, या शायद सबसे पहले उसने देखा जाना तय किया गया था। इमारत की 13वीं मंज़िल से गिरकर मरी महिला का चेहरा क्षत-विक्षत हो चुका था, लेकिन अयान शेख को इतना तो साफ दिख गया कि ये…

  • Hindi - प्रेम कहानियाँ

    दिल्ली मेट्रो का मुसाफिर

    मिताली गुप्ता १ दिल्ली की सुबहें कुछ अलग नहीं होतीं — ट्रैफिक का शोर, भागती हुई भीड़, गाड़ियों के हॉर्न और मेट्रो स्टेशनों पर गूंजती उद्घोषणाओं की आवाज़ें। लेकिन निहारिका की सुबहें उन सब से थोड़ी अलग थीं। वह हर सुबह ठीक 8:12 की ब्लू लाइन मेट्रो पकड़ती थी — द्वारका सेक्टर 9 स्टेशन से राजीव चौक तक का सफर। उसका कोच वही होता, वो खिड़की के पास की वो एक सीट तक पहुँचने का अभ्यास उसके पैरों को आदत हो गया था। चेहरे बदलते रहते थे लेकिन कुछ एक यात्री रोज़ मिलते थे — एक बुज़ुर्ग जो रामायण पढ़ते…

  • Hindi - हास्य कहानियाँ

    EMI का महा-भंवर

    संजीव मिश्रा भाग 1: किशोरलाल की किस्त-कथा किशोरलाल गुप्ता, उम्र लगभग 43 साल, पेशे से एक मध्यम दर्जे का सेल्समैन, लेकिन दिल से बहुत बड़े सपने देखने वाला इंसान था। सपना—नई चमचमाती कार, फ्लैट में दो बाथरूम, और एक स्मार्ट टीवी जिसमें नेटफ्लिक्स चले बिना बफरिंग के। पर समस्या एक ही थी—पैसे। और तब उसके जीवन में एंट्री हुई EMI की। पहली बार उसने EMI का नाम सुना था अपने ऑफिस के कलीग भोला प्रसाद से। भोला ने गर्व से बताया था, “भाई, मैंने तो अब iPhone भी EMI पे लिया है, बीवी की सिलाई मशीन भी, और बेटे की…

  • Hindi - सामाजिक कहानियाँ

    दोपहर की खिड़की

    सौरभ मेहता भाग १ शहर की उस पुरानी गली में जहाँ मकानों की छतें एक-दूसरे के कंधे पर टिकी होती हैं और गलियों की साँसें भी धीमी पड़ चुकी होती हैं, वहीं तीसरे नंबर का मकान सबसे चुप है। दीवारों की सीलन अब तस्वीरों के किनारों तक पहुँच चुकी है, और खिड़कियों से झाँकती धूप ऐसी लगती है मानो किसी ने अनजाने में दरारों के बीच से उजाला गिरा दिया हो। उसी मकान की दूसरी मंज़िल की एक खिड़की, दोपहर के ठीक बीच में खुलती थी—बिना आवाज़ के, बिना किसी आहट के। और उस खिड़की के पीछे बैठी थी—श्रीमती सावित्री…

  • Hindi - क्राइम कहानियाँ

    न्याय की आख़िरी दस्तक

    समीर त्रिपाठी भाग 1: एक लाश, एक सवाल बारिश की बूंदें जैसे अदालत की खिड़कियों से टकरा रही थीं, वैसी ही बेचैनी आज सत्र न्यायाधीश आरव मल्होत्रा के चेहरे पर थी। कोर्ट रूम नंबर ३ में उस दिन एक ऐसा मामला पेश हुआ था जो पिछले चार महीने से पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ था — ‘पारुल मर्डर केस’। पारुल वर्मा, 28 वर्ष की स्वतंत्र पत्रकार, जिसकी लाश पुराने पुल के नीचे मिली थी, चेहरे पर ज़ख़्म, गर्दन पर खरोंचें और हाथ में एक टूटी हुई रबर बैंड। अभियुक्त था — अर्णव चोपड़ा, पारुल का पूर्व प्रेमी,…

  • Hindi - प्रेतकथा

    पीपल का शाप

    शक्कर रञ्जन महापात्र जब बप्पा भानगढ़ी गाँव पहुँचा, तो आसमान धूसर था और धूप जैसे छिप कर बैठ गई थी। बस से उतरते ही उसे सबसे पहले महसूस हुआ मिट्टी की सोंधी गंध, जो बारिश से पहले की नमी जैसी लग रही थी। गाँव छोटा था, मगर उसकी खामोशी में कोई अजीब सी बात थी—जैसे कोई सब कुछ देखकर भी अनजान बना हो। स्टेशन से निकलकर वह जब कच्चे रास्ते पर चला, तो देखा कि बच्चे खेलते समय अचानक चुप हो जाते हैं, और बूढ़े अपनी छड़ी थामे, गर्दन झुका कर ऐसे निकल जाते हैं जैसे आँखें मिलाना कोई अपराध…

  • Bangla - प्रेम कहानियाँ

    ক্যালেন্ডারের বাইরের দিনগুলো

    তিস্তা বন্দ্যোপাধ্যায় পর্ব ১: প্রথম ইমেল সকালটা শুরু হয়েছিল একেবারে নির্লিপ্তভাবে। স্নান, ব্রেকফাস্ট, মেট্রো, আর তারপর অফিস। কিন্তু সেই নির্লিপ্ততাকে ভেঙে দিল একটা ইমেল—অপরিচিত প্রেরকের, বিষয়বস্তু: “Couldn’t help noticing your post-it habit.” অপরাধ যেন হাতে নাতে ধরা পড়েছে। অনন্যা বসু, এইচআর ডিপার্টমেন্টের অ্যাসিস্ট্যান্ট ম্যানেজার, যাঁর ডেস্ক সবসময় একটা রঙিন ঝকঝকে পোস্ট-ইটের সাম্রাজ্য, প্রথমে একটু চমকে উঠলেন। তারপর হাসলেন। কে এই মানুষটা? অফিসের কেউই হবে। না হলে তো তাঁর ডেস্ক পর্যন্ত নজর পড়ে না। ইমেলের শেষে সিগনেচার ছিল—“Regards, S. Dey, Product Strategy.” অ্যাপ্লিকেশন ওপেন করে লগ-ইন করলেন অনন্যা। “S. Dey”—মানে কি সেটা সুদীপ? না শুভম? স্ট্র্যাটেজিতে তো কয়েকজন নতুন এসেছে। আবার…