हास्य कहानियाँ
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रामलाल का भूतिया स्कूटर
सुभाष मिश्र रामलाल फतेहपुर कस्बे की एक तंग गली में रहने वाला एक साधारण आदमी था। उम्र कोई पैंतालीस के आसपास, चेहरे पर झुर्रियों की कुछ रेखाएँ जो हर सुबह के संघर्ष और हर शाम की थकान की गवाही देती थीं। पेशे से वह नगरपालिका दफ्तर में एक लिपिक था, और महीने की पहली तारीख…
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पिंकी की साइकिल
संदीप मिश्रा सुबह की हल्की धूप मोहल्ले की पतली गली में सुनहरी चादर बिछा रही थी। अमरुद के पेड़ों पर बैठी चिड़ियाँ अपनी चहचहाहट से जैसे कोई संदेश दे रही थीं। हवा में सुबह-सुबह खिले गेंदा और गुलाब के फूलों की खुशबू घुली हुई थी। पर आज मोहल्ले में रोज की तरह सुस्ताता सन्नाटा नहीं…
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घड़ी गई तो गड़बड़ शुरू
सौरभ मिश्रा भाग 1 लक्ष्मी नगर की गली नंबर सात में एक बड़ा ही विचित्र मामला हुआ। बाबूलाल जी की घड़ी चोरी हो गई। अब आप सोचेंगे, इसमें क्या बड़ी बात है? लेकिन जनाब, ये कोई मामूली घड़ी नहीं थी। ये वही ‘ओमेगा’ घड़ी थी जो बाबूलाल जी ने अपने रिटायरमेंट के समय खुद को…
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बड़े बाबू का चश्मा
शरद ठाकुर लखनऊ के पुराने चौक मोहल्ले में एक लाल-ईंटों की हवेली है, जिसकी दीवारों पर वक़्त ने अपनी रेखाएँ खींच दी हैं। उसी हवेली के आँगन में, आम के पुराने पेड़ के नीचे रखी एक बेंत की कुर्सी पर हर सुबह विराजमान होते हैं—श्री बृजमोहन तिवारी, उर्फ़ बड़े बाबू। उम्र लगभग सत्तर पार, लेकिन…
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अंधेरे में हँसी
अमूलिक त्रिपाठी भाग 1 रतनलाल मिश्र को रिटायर हुए दो साल हो चुके थे, लेकिन मोहल्ले में अब भी लोग उन्हें ‘मिश्र जी पोस्टमैन’ कहकर बुलाते थे। असली नाम से कोई कुछ नहीं पुकारता, जैसे आदमी नहीं, उसकी पुरानी नौकरी ही उसकी पहचान हो। रतनलाल को इससे कोई आपत्ति नहीं थी। अब तक तो आदत…






