प्रेतकथा
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भूतों का मेला
१ राजस्थान की तपती धरती पर बीकानेर से करीब ८० किलोमीटर उत्तर-पश्चिम की ओर बसे कर्णसर गाँव की ओर बढ़ते हुए विराज प्रताप शेखावत के कैमरे का लेंस हर बंजर टीले, हर झुलसे पेड़, और हर झोंपड़ी को अपनी स्मृति में कैद कर रहा था। उसकी SUV रेत में बार-बार धँसती, पर चालक रफीक के…
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नीली चूड़ियों की आवाज़
सोनल शर्मा पहली रात बसेरिया में प्राची मिश्रा की कार धूल उड़ाती हुई जब बसेरिया गांव के छोर पर पहुँची, तब शाम के साढ़े पाँच बज रहे थे। चारों ओर पीली रोशनी में नहाया खेत, सूखी घास की सरसराहट और दूर कहीं पीपल के पेड़ पर बैठे कौवे की कांव-कांव। उसने कार से उतरते हुए…
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मसान की दुल्हन
तपन मिश्रा वाराणसी का स्टेशन, सुबह की भीड़, लाउडस्पीकर पर गूंजती announcements, और हवा में फैली एक चिरपरिचित गंध—धूप, धूल, और जलते घी की। अंशुमान का कैमरा उसकी छाती से लटका था, और उसकी आँखों में तलाश थी—एक अलग दुनिया की, उस लकीर के पार की जहाँ जीवन और मृत्यु हाथ थामे चलते हैं। वह…
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पीपल का शाप
शक्कर रञ्जन महापात्र जब बप्पा भानगढ़ी गाँव पहुँचा, तो आसमान धूसर था और धूप जैसे छिप कर बैठ गई थी। बस से उतरते ही उसे सबसे पहले महसूस हुआ मिट्टी की सोंधी गंध, जो बारिश से पहले की नमी जैसी लग रही थी। गाँव छोटा था, मगर उसकी खामोशी में कोई अजीब सी बात थी—जैसे…
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शापित हवेली
कविता राठौड़ भाग १: हवेली के द्वार पर अद्वैता के हाथ में कैमरा और बैग था, और दिल में एक अजीब सी उत्सुकता। दिल्ली विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर थी वो—थीसिस का विषय था: “राजस्थान की लोककथाओं में भूत–प्रेत की उपस्थिति और उसका सामाजिक प्रभाव“। इस सिलसिले में वह पहुँची थी झुंझुनूं जिले के पास बसे…
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काले पानी की हवेली
रथिन गुप्ता अंधविश्वास की धरती लखनऊ की हलचल भरी गलियों और चमकती सड़कों से निकलते समय पावन त्रिपाठी के दिल में एक अजीब सी बेचैनी थी। पत्रकारिता और ब्लॉगिंग की दुनिया में वह नाम तो कमा चुका था, लेकिन उसकी आत्मा को हमेशा कुछ अनछुए रहस्यों की तलाश रहती थी, जो लोगों की जुबां पर…
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पूर्वकथा का शाप
अनामिका तिवारी अध्याय १: वह शिलालेख धूप की किरणें पहाड़ की चोटियों को छूते हुए नीचे बसे गाँव को जगाने लगी थीं। पहाड़ी हवा में अभी भी रात की ठंडक बाकी थी। गाँव का नाम था “बद्रीनगर” — सघन देवदारों के बीच बसा एक छोटा-सा अज्ञात गाँव, जहाँ समय मानो रुक गया हो। बद्रीनगर की…
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कोठी का कमरा नंबर 9
निहार राठौड़ राजगढ़ स्टेशन पर शाम के पाँच बज चुके थे, लेकिन उस छोटे से प्लेटफ़ॉर्म पर वक्त ठहरा हुआ लगता था। धूल से सनी पीली बेंचें, खामोश ट्रैक, और स्टील के पुराने खंभों पर टिमटिमाती मटमैली बत्तियाँ—सबकुछ जैसे किसी भूतपूर्व समय की तस्वीर हो। अर्जुन ठाकुर, तीस वर्ष का एक तेज़-तर्रार स्वतंत्र पत्रकार, दिल्ली…
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सुनसान सड़क
वह रास्ता और वह लड़की चाँदनी रात थी, लेकिन आकाश में बादलों की हल्की परतें तैर रही थीं। समय था रात के साढ़े नौ, जब राहुल और कबीर नैनीताल की ओर अपनी मारुति कार में चल रहे थे। दोनों दोस्त दिल्ली से वीकेंड ट्रिप पर निकले थे। हाईवे पर ट्रैफिक ज्यादा होने की वजह से…
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वापसी – हवलदार की आत्मा
निरंजन पाठक राजीव शर्मा एक तेज़-तर्रार और तर्कशील पत्रकार था। वह हमेशा से उन कहानियों के पीछे भागता था, जिनमें रहस्य, सनसनी और थोड़ा खतरा हो। दिल्ली के एक प्रमुख न्यूज़ पोर्टल में काम करते हुए उसने कई बार विवादास्पद रिपोर्टों पर काम किया था, लेकिन अब वह कुछ अलग करना चाहता था — ऐसा…
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काला रहस्य
अभिज्ञान मेहता आगमन गहरी रात थी। झारखंड की पहाड़ियों के बीच बसा बिसराडीह गाँव जैसे नींद में था, लेकिन हवा में कुछ असामान्य था। रिया चौधरी, एक नवयुवती खोजी पत्रकार, टैक्सी की खिड़की से बाहर झांक रही थी। कोलकाता से तकरीबन 300 किलोमीटर की दूरी तय कर वह इस रहस्यमयी गाँव में पहुँच चुकी थी।…











