अनिरुद्ध राजन मिश्रा वाराणसी की तंग गलियों में वो रात कुछ ज्यादा ही खामोश थी, जैसे कोई बड़ा तूफान पहले ही सब उजाड़ चुका हो। इंस्पेक्टर अयान शुक्ला की जीप जब कोतवाली इलाके की उस मोड़ पर पहुँची, तो चारों तरफ भीड़ जमा हो चुकी थी। लाल-नीली बत्तियों की चमक पुलिस की असहज उपस्थिति दर्ज करा रही थी, लेकिन वहां खड़ा हर शख्स जानता था — ये कोई आम मर्डर नहीं। “कौन है?” अयान ने उतरते ही पूछा। “साहब… एक औरत है,” कॉन्स्टेबल दुबे ने सिर झुकाते हुए जवाब दिया, “किसी ने सिर पर वार किया है, मौके पर ही…