कविता राठौड़ भाग १: हवेली के द्वार पर अद्वैता के हाथ में कैमरा और बैग था, और दिल में एक अजीब सी उत्सुकता। दिल्ली विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर थी वो—थीसिस का विषय था: “राजस्थान की लोककथाओं में भूत–प्रेत की उपस्थिति और उसका सामाजिक प्रभाव“। इस सिलसिले में वह पहुँची थी झुंझुनूं जिले के पास बसे एक छोटे से गाँव—आकनपुर। इस गाँव के बाहरी छोर पर स्थित थी—वो काली, विशाल, वीरान ठाकुर हवेली, जहाँ पिछली आधी सदी से कोई नहीं रहता। पर जहां हर रात दीयों की रौशनी और किसी औरत के रोने की आवाज़ आती थी—ऐसा गाँव वाले कहते थे।…