• English - Fiction - Romance

    रात की आख़िरी बूँद

    रेशमा गुलज़ार 1 दिल्ली की गर्मी जब जून के तीसरे हफ्ते में साँस लेने लगती है, तो शामें धुएँ में घुल जाती हैं। ट्रैफिक की आवाजें खिड़कियों के भीतर तक आती हैं, और पर्दे धीमे-धीमे नाचते हैं, जैसे किसी ने उन्हें एक धीमा राग गुनगुनाया हो। अन्वी ने लैपटॉप बंद किया। स्क्रीन पर वो तीसरा पैराग्राफ अब भी अधूरा था—एक स्त्री का स्पर्श लिखते-लिखते उसकी अपनी त्वचा पर सिहरन सी दौड़ गई थी। उसने कॉफ़ी मग उठाया, जो अब ठंडा हो चुका था। बालों की एक लट उसकी गर्दन पर टिक गई थी—गर्मी और अधूरी नींद दोनों की गवाही देती…