• Hindi - सामाजिक कहानियाँ

    तुम्हारे साथ, मेरा होना

    अमूलिक त्रिपाठी 1 गाँव की आखिरी गली में खड़ा बांस का पेड़ अब बूढ़ा हो चला था। उसकी शाखाएँ जैसे समय के हाथों से झुक गई थीं, और पत्तियाँ… हर साल कम होती जा रही थीं। उसी पेड़ के नीचे आज भी वही पुराना पत्थर पड़ा था, जहाँ कभी शाम को सोनू, रमिया और बाकी दोस्त बैठा करते थे। अब ना वो शोर था, ना कहकहे, बस एक सन्नाटा था जो हर चीज़ में रिसता चला आया था। सोनू वहीं बैठा था, मोबाइल की स्क्रीन पर उँगलियाँ घुमा रहा था, लेकिन आँखें कहीं और थीं। कानों में हल्की आवाज़ में…