मनीष कुमार तिवारी भोपाल की शाम में एक अजीब सी खामोशी थी, जैसे कोई पुरानी आवाज़ शहर की हवाओं में छुपी हुई हो। रामस्वरूप मिश्रा, पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हवलदार, का पार्थिव शरीर श्मशान से घर वापस नहीं आया था — वह वहीं राख बन चुका था, और अब केवल स्मृतियों में बचा था। उनके बेटे अभिषेक मिश्रा ने अनगिनत हाथ मिलाए, नम आँखें देखीं और एक अजीब से खालीपन को अपने भीतर महसूस किया। पंडित, रिश्तेदार और कुछ पुराने सहयोगी भी आए थे, लेकिन सबसे ज़्यादा चुभती थी वह चुप्पी जो उनकी माँ संध्या के चेहरे पर थी —…
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सम्वित शर्मा अध्याय १: एक और गिरावट बारिश की एक भारी रात थी, जब मुंबई की गगनचुंबी इमारत ‘ओशन व्यू हाइट्स’ के नीचे पुलिस की गाड़ियाँ जमा हो गईं। चारों तरफ नीली-लाल बत्तियों की झिलमिलाहट में भीगते हुए कुछ लोग भीड़ बनाकर खड़े थे, और बीच में एक पीले प्लास्टिक की शीट से ढका शव—एक और मौत। सेक्योरिटी गार्ड ने सबसे पहले देखा था, या शायद सबसे पहले उसने देखा जाना तय किया गया था। इमारत की 13वीं मंज़िल से गिरकर मरी महिला का चेहरा क्षत-विक्षत हो चुका था, लेकिन अयान शेख को इतना तो साफ दिख गया कि ये…