१ उत्तराखंड की बर्फ़ से ढकी चोटियाँ सर्दियों की ठंडी साँसों के साथ रहस्यों को भी संजोए रहती हैं। यहाँ की वादियों में हर सरसराती हवा, हर बहती धारा, हर देवदार का पेड़ किसी पुरानी कहानी की गवाही देता है। स्थानीय गाँवों में अक्सर रात की अलाव बैठकों में बूढ़े बुजुर्ग एक ही कथा बार-बार सुनाते हैं—“काले साधु” की। यह साधु कोई साधारण संन्यासी नहीं था, बल्कि ऐसा सन्यासी जिसने अमरत्व की चाह में अपने जीवन को काले तंत्र की ओर मोड़ दिया। कहते हैं कि सदियों पहले उसने एक बर्फ़ीली गुफा को अपनी साधना का स्थान चुना और वहाँ…
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मानव वर्धन १ मध्य प्रदेश के भीतरी हिस्सों में बसा था एक पुराना, लगभग भुला दिया गया गाँव — बेरोज़ा। इस गाँव का नाम तक मानचित्रों में साफ़ नहीं दिखता था, लेकिन उसकी कहानियाँ लोकगीतों और बुज़ुर्गों की फुसफुसाहटों में अब भी ज़िंदा थीं। किसी जमाने में यह इलाका राजा वीरप्रताप सिंह के अधीन था, जिनकी विशाल हवेली अब वीरान पड़ी थी। हवेली की जर्जर दीवारें, छत पर उगी काई, टूटी खिड़कियाँ और सामने की परछाइयाँ — सब मिलकर उस जगह को किसी शापित चित्र की तरह बनाते थे। पत्रकार शौर्य वर्मा और उसकी कैमरा ऑपरेटर मित्र दीपिका उस दिन…
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मालविका नायर १ समुद्र की लहरों की निरंतर गूंज और उस पर खड़ा बेकल किला — केरल की सबसे प्राचीन और रहस्यमयी किलों में से एक, जहाँ इतिहास केवल पत्थरों पर नहीं, हवाओं में दर्ज है। जान्हवी शर्मा की नजरों में ये किला सिर्फ एक वास्तुकला नहीं था, बल्कि एक अदृश्य आवाज़ थी जो सदियों से किसी को पुकार रही थी। दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में शोध कर रही जान्हवी तटीय दुर्गों पर काम कर रही थी, लेकिन जब उसने “रक्त कमल” के नाम से जुड़ी एक पुरानी मलयालम पांडुलिपि पढ़ी, तो वह विचलित हो उठी। उस लेख में उल्लेख…
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शुभदीप मिश्र वाराणसी स्टेशन की गर्म हवा में अजीब-सी गंध थी—कुछ धूप की, कुछ पुराने लोहे की, और कुछ जैसे समय की। शौर्य व्यास ने अपने ट्रॉली बैग का हत्था कसकर पकड़ा और भीड़ को चीरते हुए बाहर निकला। सालों बाद भारत लौटना उसे उतना अजनबी नहीं लगा, जितना लगा व्यास निवास का नाम सुनते ही मन में उभर आया अनकहा डर। वह तेरह साल का था जब उसके पिता की अचानक मौत के बाद मां ने उसे लंदन भेज दिया था, और तब से उसने कभी बनारस की ओर मुड़कर नहीं देखा। पर अब, वर्षों बाद, वकील के एक…