• Hindi - यात्रा-वृत्तांत

    धागों के उस पार – एक रामेश्वरम यात्रा

    नीलय मेहता अनिरुद्ध सेनगुप्ता ने स्टेशन पर रुकती उस ट्रेन को देखा तो कुछ देर तक बस खड़ा रहा, जैसे कोई अंतर्मन उसे रोक रहा हो या शायद वही धक्का दे रहा हो जिसकी उसे वर्षों से तलाश थी। चेन्नई एগ्मोर से रामेश्वरम जाने वाली वह रात की ट्रेन उसके लिए किसी साधारण सफ़र का ज़रिया नहीं थी—वह एक ऐसा दरवाज़ा थी, जो उसे उसके भीतर की किसी गूंजती आवाज़ तक ले जाने वाली थी। टिकट खिड़की पर लंबी लाइन, प्लेटफॉर्म की गंध, खड़खड़ाती ट्रॉली और चायवालों की पुकार—यह सब अनिरुद्ध को परिचित सा लगा लेकिन उस दिन हर आवाज़…