• Hindi - रहस्य कहानियाँ

    अंधेरे की परछाइयाँ

    विवेक यादव १ दिल्ली की हल्की सर्दियों की उस सुबह अर्जुन सिंह की आंखें अलार्म घड़ी की कानफाड़ू आवाज़ से खुलीं, पर दिलो-दिमाग में जो बेचैनी थी, वह किसी अलार्म से नहीं जागी थी। अपने छोटे से किराये के फ्लैट में अर्जुन ने दीवार पर टंगी घड़ी की ओर देखा—सुबह के सात बजने वाले थे। बाहर से दूधवाले की साइकिल की घंटी, अखबार के लड़के की पुकार और पड़ोसी की चाय के प्याले की खनक सुनाई दे रही थी, मगर अर्जुन का मन इन साधारण आवाजों से परे किसी और ही दुनिया में भटक रहा था। वो दुनिया, जो सपनों…