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  • कालीन की नज़रों वाला घर

    कालीन की नज़रों वाला घर

    १ कर्नाटक के एक पुराने शहर में अर्जुन वर्मा और उनकी पत्नी नैना वर्मा अपने बेटे रोहन के साथ नए जीवन की शुरुआत करने के लिए एक पुराना घर खरीदने का निर्णय लेते हैं। अर्जुन, जो इतिहास के प्रोफेसर हैं, और नैना, जो एक फ्रीलांस आर्टिस्ट हैं, दोनों ही शहर के शोरगुल से दूर, शांति…

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  • बारिश की महक

    बारिश की महक

    १ मुंबई की हलचल भरी सुबह में, जब अरब क्रिएटिव एजेंसी की 12वीं मंज़िल पर धूप कांच की दीवारों से छनकर बोर्डरूम में गिर रही थी, तभी नए कैंपेन की मीटिंग शुरू हुई। एजेंसी का यह सबसे बड़ा प्रोजेक्ट था—एक इंटरनेशनल ब्रांड का भारत में पहला बड़ा लॉन्च—और हर कोई इस मीटिंग में अपनी चमक…

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  • पुल के नीचे

    पुल के नीचे

    दिव्या चावला १ जून की एक नमी से भरी, भारी-सी रात थी। मुंबई की बारिश अपनी पूरी ताक़त के साथ बरस रही थी, सड़कें पानी से भर चुकी थीं और कहीं-कहीं रेल की पटरियों के नीचे पानी बहने की आवाज़ एक अजीब-सी लय बना रही थी। शहर के पुराने हिस्से में, लोहे का वह पुल…

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  • रात का दूसरा किनारा

    रात का दूसरा किनारा

    आर्या मेहता पुराने शहर की गलियों में नवंबर की धुंध ऐसे उतरती थी, जैसे कोई धीमी धुन दीवारों पर टिक-टिक करती हो। शाम के पाँच बजते ही सफ़ेद रोशनी वाले बल्बों के चारों ओर पतंगों की नन्ही परिक्रमा शुरू हो जाती, और मिट्टी से आती सोंधी गंध लोगों के चेहरों पर अनजाने-से भाव रच देती।…

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  • नीले जंगल का साया

    नीले जंगल का साया

    आरव सिंह ठाकुर भाग 1: पहाड़ की पहली चीख धुंध सुबह की खिड़की पर जम चुकी थी जैसे किसी ने रात भर चुपचाप रोते हुए आंसुओं से शीशा धो डाला हो मलाणा घाटी में सूरज का उदय हमेशा देर से होता है लेकिन उस दिन उसकी रौशनी जैसे खुद डर गई थी गांव के ऊपर…

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  • रात की रौशनी में तुम

    रात की रौशनी में तुम

    तृषा तनेजा १ धुंध से भरी उस सुबह में, पहाड़ों का रंग नीला नहीं था—वह कुछ धुंधला, कुछ राखी था, जैसे नींद से आधे जागे किसी ख्वाब के किनारे खड़े हों। चित्रधारा नामक इस छोटे से पहाड़ी कस्बे में पहली बार कदम रखते ही दक्ष सहगल को लगा मानो किसी भूली हुई याद की गलियों…

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  • पाँचवां कमरा

    पाँचवां कमरा

    कृष्णा तामसी १ चारों तरफ बर्फ की सफेद चादरें बिछी थीं और हरे देवदार के पेड़ जैसे किसी पुराने रहस्य को छिपाए खड़े थे। आरव मल्होत्रा की जीप धीरे-धीरे घने कोहरे को चीरती हुई हिमाचल के दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजर रही थी। मोबाइल नेटवर्क कब का गायब हो चुका था और जीपीएस भी मानो…

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  • विवेक सरीन

    विवेक सरीन

    कालसूत्र भाग 1: वरसा का खून मुंबई की उस रात में समुद्र शांत नहीं था। लहरों का शोर सड़क की सन्नाटे को काटता जा रहा था, और बंदरगाह की ओर दौड़ती एक काली SUV की हेडलाइट्स किसी अजाने फैसले की गवाही दे रही थीं। गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा था आदित्य वरसा — वरसा…

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  • साया

    साया

    १ शाम के साढ़े नौ बज रहे थे। शहर के सबसे पॉश इलाके, वसंत विहार के बंगला नंबर 47 में एक अजीब सी शांति फैली हुई थी। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी, और भीतर की दुनिया किसी रहस्य को अपने अंदर समेटे चुप थी। इस घर के मालिक, विवेक मल्होत्रा, एक नामचीन उद्योगपति थे…

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  • कांता बुआ की कन्याकुंभ यात्रा

    कांता बुआ की कन्याकुंभ यात्रा

    विपुल शर्मा भाग 1: बुआ का एलान बिल्लूपुर की सुबहें आमतौर पर कबूतरों की गुटरगूँ, चाय की पहली चुस्की, और दूधवाले की साइकिल की घंटी से शुरू होती थीं। लेकिन उस दिन की सुबह कुछ अलग थी। गाँव के मंदिर के सामने चौपाल में, नीम के नीचे बैठी कांता बुआ ने एक ज़ोरदार चाय की…

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  • ख्वाबों के उस पार

    ख्वाबों के उस पार

    अदिति राठी भाग 1: मुलाक़ात पन्ना की सर्दी में धूप एक वरदान जैसी लगती थी। स्कूल की छत पर बिछी टाट की चटाइयों पर बच्चे बैठकर चित्र बना रहे थे—सूरज, पेड़, झोपड़ी, और किसी कोने में एक मंदिर की घंटियां। रेवती चौहान बीच में खड़ी, बच्चों की तस्वीरों पर झुकती, तारीफ़ करती और कभी-कभी पेंसिल…

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  • आख़िरी अपडेट

    आख़िरी अपडेट

    दिल्ली के शाहपुर जाट इलाके की पतली गलियों में, एक पुरानी इमारत की तीसरी मंज़िल पर अवनि शर्मा ने हाल ही में किराए पर एक फ्लैट लिया था। मकान मालिक ने कहा था, “थोड़ा पुराना है, मगर शांत इलाका है।” अवनि को यही चाहिए था—शांति। एकाकी ज़िंदगी, कॉफी मग में भाप लेती शामें, लैपटॉप पर…

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