Hindi
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दुपट्टा और स्टेथोस्कोप
अन्वी शर्मा १ लखनऊ मेडिकल कॉलेज की सुबह हमेशा अलग होती थी—कभी नीले आसमान में सूरज की तेज़ धूप सीधी इमारतों की सफ़ेद दीवारों पर पड़कर चमक उठती, तो कभी बरामदों में टंगे नीले-हरे कोट और सफ़ेद लैब कोट हवा में झूलते रहते। उस सुबह कैंपस में एक अलग ही हलचल थी, क्योंकि नए बैच…
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मोबाइल का मिस्ड कॉल
आरव मेहरा भाग 1 — अनजान आवाज़ उस रात दिल्ली की हवा में नमी थी और मेरी खिड़की पर महीन बारिश टपक रही थी। मैं लैपटॉप बंद करके बिस्तर पर गिरा ही था कि फोन बज उठा—एक नंबर जो पहले कभी नहीं देखा। मैंने उठाया, “हेलो?” दूसरी तरफ एक गहरी साँस, फिर धीमी आवाज़, “सॉरी……
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कागज़ की दीवारें
दीपक मेहता भाग १ : नोटिस की दीवार सुबह का सूरज अभी ठीक से निकला भी नहीं था कि झुग्गी बस्ती की गलियों में हलचल मच गई। बच्चे स्कूल जाने की तैयारी में थे, औरतें चूल्हे पर चाय रख रही थीं, और आदमी अपने-अपने काम पर निकलने की सोच रहे थे। तभी किसी ने चिल्लाकर…
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आख़िरी पन्ना
समीरा चतुर्वेदी १ काव्या के लिए किताबों की दुकान किसी मंदिर से कम नहीं थी। हर शनिवार दोपहर वह अपने बैग में एक नोटबुक और पेन रखकर मेट्रो से सीधे कनॉट प्लेस की उस संकरी गली में उतरती, जहाँ लकड़ी की अलमारियों और पुराने काग़ज़ की गंध से भरी वह छोटी-सी दुकान थी। बाहर से…
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खून से लिखा ख़त
पवन कुमार शाह इलाहाबाद शहर की तंग गलियों के बीचोंबीच बसा हुआ वह पुराना डाकघर बरसों से अपनी जगह पर वैसे ही खड़ा था जैसे समय ने उसे भुला दिया हो। चारों ओर से छिल चुकी पपड़ी वाली दीवारें, जंग खाए लोहे के गेट और मकड़ी के जालों से भरे छज्जे इस इमारत की थकान…
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खून का सौदा
राहुल देव मुंबई की बारिश अक्सर शहर को धो देती थी, पर उस रात की बारिश ने मानो अपराध की गंध को और गाढ़ा कर दिया था। लोअर परेल की एक संकरी गली में पीली बत्तियों के नीचे पानी चमक रहा था। उसी अंधेरे में एक आदमी दौड़ रहा था—काले रेनकोट में, हाथ में किसी…
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छठ घाट का खून
अनुभव कुमार १ गंगा नदी के तट पर पटना का छठ घाट उस शाम अलौकिक सौंदर्य से भरा हुआ था। सूरज धीरे-धीरे क्षितिज में ढल रहा था और उसकी सुनहरी किरणें गंगा के जल पर फैलकर पूरे वातावरण को एक अद्भुत आभा प्रदान कर रही थीं। हज़ारों श्रद्धालु, महिलाएँ रंग-बिरंगे साड़ी में, पुरुष पारंपरिक धोती-कुर्ता…
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चाँदनी चौक की मोहब्बत
आरव सक्सेना भाग 1 : भीड़ के बीच पहली नज़र पुरानी दिल्ली का दिल है चाँदनी चौक। यहाँ की गलियाँ इतनी तंग हैं कि दो साइकिलें साथ निकलें तो लगता है जैसे दीवारें कानाफूसी कर रही हों। सुबह का वक़्त था। सूरज की सुनहरी रोशनी लाल क़िले की बुर्ज़ों से उतरकर हौज़ क़ाज़ी की तरफ़…
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गली-गली बनारस
आरव मिश्र पर्व 1: घाटों का सवेरा बनारस की सुबह का कोई मुकाबला नहीं। यह शहर जिस तरह हर दिन की शुरुआत करता है, वैसा और कहीं नहीं होता। जैसे ही पहली किरण गंगा पर गिरती है, शहर की गलियाँ धीरे-धीरे जागने लगती हैं। रात की निस्तब्धता टूटकर धीरे-धीरे जीवन की चहचहाहट में बदल जाती…
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तेरे नाम की ख़ामोशी
स्मृति चौहान भाग 1 – मुलाक़ात दिल्ली की उस ठंडी सुबह में हवा में हल्की धुंध घुली थी। कनॉट प्लेस की गोलाई पर कॉफ़ी शॉप्स की हलचल धीरे-धीरे बढ़ रही थी। भीड़ के बीच भी आरव को सब कुछ फीका लग रहा था। वह अपने लैपटॉप बैग को कंधे पर टाँगे एक पुरानी किताब की…
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अधूरी बारात
मनीषा राठौड़ १ राजस्थान का रेगिस्तान दिन में तपती धूप और रात में सिहरन भरी ठंड से भरा रहता है। लेकिन इन सबके बीच, उस वीराने में बसा छोटा-सा गाँव धोराबावड़ी अपनी अजीबोगरीब दास्तान के लिए मशहूर है। यह गाँव चारों तरफ़ फैली रेतीली ढलानों और दूर-दूर तक बिछी झाड़ियों के बीच बसा है। दिन…
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एलाहाबाद की अड्डेबाज़ी
आरव तिवारी भाग 1 – संगम किनारे की शुरुआत इलाहाबाद की शामें हमेशा से अनोखी रही हैं। जहाँ एक ओर संगम का किनारा अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से लोगों को आकर्षित करता है, वहीं दूसरी ओर सिविल लाइन्स और कटरा की गलियों में एक अलग ही ज़िंदगी धड़कती है। विश्वविद्यालय के सामने की चाय…












