Hindi

  • दिल का रास्ता

    दिल का रास्ता

    स्मिता कपूर करण एक सफल वकील था, जो हमेशा तर्क और क़ानून के आधार पर अपनी ज़िंदगी जीता था। उसने कभी भी अपनी भावनाओं को प्राथमिकता नहीं दी थी, और उसकी पूरी दुनिया सख्त अनुशासन और काम के हिसाब से चलती थी। वह अपने पेशे में माहिर था, और समाज में उसका सम्मान था। लेकिन…

    read more

  • पप्पू IAS बन गया!

    पप्पू IAS बन गया!

    देवांशु मिश्र छींकापुर, ऐसा गाँव जहाँ हर दूसरे दिन बिजली जाती है और हर चौथे दिन चौधरी जी की बकरी। यहाँ के लोग ताश खेलते हुए दुनिया की राजनीति तय करते हैं और बीड़ी पीते हुए शेयर मार्केट की चाल समझाते हैं। इसी गाँव का सबसे विशेष जीव था—पप्पू यादव। उम्र 28, काम-काज शून्य, मगर…

    read more

  • काली डायरी

    काली डायरी

    श्रुति चतुर्वेदी १ बनारस की संकरी गलियों में सुबह का उजाला अक्सर धुएँ और धूल में घुला होता है, लेकिन उस दिन ठंड के कुहासे में जो चीज़ सबसे अलग दिखी, वो था—शव। सोनारपुरा की एक टूटी-फूटी हवेली के पीछे कूड़े के ढेर पर मिली थी एक लाश—एक अधेड़ उम्र के आदमी की, जिसकी आँखें…

    read more

  • द्रूपदी की आवाज़

    द्रूपदी की आवाज़

    रागिनी जैन अध्‍याय १: शालिनी और विशाल, दिल्ली से एक नई शुरुआत करने के लिए सिक्किम के एक छोटे से गांव में आकर बस गए थे। यह फैसला उन्होंने बहुत सोच-समझ कर लिया था। दोनों का मानना था कि शहर की भीड़-भाड़ और व्यस्तता से दूर, पहाड़ों में एक शांत जीवन जीना उनके लिए सबसे…

    read more

  • काली चट्टान का रहस्य

    काली चट्टान का रहस्य

    शिवांगी तिवारी 1 मुंबई से लगभग 40 किलोमीटर दूर, समंदर के किनारे एक छोटा-सा गांव है—रॉकविले। यह गांव शहर की चकाचौंध से दूर है, लेकिन वहां की सबसे खास और डरावनी चीज़ है—’काली चट्टान’। हर शाम समंदर के बीचोंबीच उस काली चट्टान पर एक अजीब-सा नीला उजाला दिखाई देता है। कोई नहीं जानता वो रोशनी…

    read more

  • समंदर के किनारे इश्क

    समंदर के किनारे इश्क

    कविता प्रधान मुंबई की बारिश किसी पुराने फ़िल्मी गीत की तरह होती है — धीमी, भीगी, और दिल में उतरती हुई। शहर की रफ्तार थोड़ी थम जाती है, पर दिलों की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं। जुहू चौपाटी की रेत उस दिन भीगी हुई थी, हवा समंदर से नमक चुराकर ला रही थी, और आसमान…

    read more

  • क़ातिल की आहट

    क़ातिल की आहट

    किरण मलिक १ दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक इलाके, कनॉट प्लेस के एक शाही अपार्टमेंट में एक सनसनीखेज हत्या हुई। ये हत्या उस इलाके के मशहूर और सफल कॉर्पोरेट लॉयर, नेहा सूद की थी। रविवार की सुबह, उनके अपार्टमेंट से एक अजीब गंध उठी, जो कि पड़ोसियों को खींच लाई। जब पुलिस और फायरब्रिगेड की टीम…

    read more

  • साँझ की रोशनी में गोवा

    साँझ की रोशनी में गोवा

    मायूरी शंकर माया ने मुंबई की व्यस्त और तनावपूर्ण जिंदगी से थक कर गोवा जाने का फैसला किया था। वह एक कॉर्पोरेट पेशेवर थी, जो अपने काम में हमेशा डूबी रहती थी। हर दिन की भागदौड़, मीटिंग्स और डेडलाइन्स ने उसे मानसिक और शारीरिक थकावट का शिकार बना दिया था। वह किसी तरह अपने कार्यों…

    read more

  • भूतों का मेला

    भूतों का मेला

    १ राजस्थान की तपती धरती पर बीकानेर से करीब ८० किलोमीटर उत्तर-पश्चिम की ओर बसे कर्णसर गाँव की ओर बढ़ते हुए विराज प्रताप शेखावत के कैमरे का लेंस हर बंजर टीले, हर झुलसे पेड़, और हर झोंपड़ी को अपनी स्मृति में कैद कर रहा था। उसकी SUV रेत में बार-बार धँसती, पर चालक रफीक के…

    read more

  • सीलन की दीवार

    सीलन की दीवार

    अनुज वर्मा दिल्ली की उमस भरी गर्मी की दोपहर में नेहा शर्मा जब पुरानी दिल्ली की तंग गलियों से होकर उस हवेली की तरफ़ बढ़ी, तो उसके दिल में हल्का-सा डर और अजीब-सी उत्सुकता एक साथ उभर आई। हवेली का नाम उसने कई बार सुना था, अख़बारों में उसकी तस्वीरें भी देखी थीं, पर सामने…

    read more

  • काली खदान की चीख

    काली खदान की चीख

    शिवांगी राणा 1 कालाजोर। झारखंड-बिहार की सीमा पर बसा एक छोटा-सा कस्बा, जो अब धीरे-धीरे एक कोयला साम्राज्य की अंधेरी गहराइयों में समा चुका है। सूरज की पहली किरणें भी यहाँ की काली मिट्टी में अपना रंग खो देती थीं। एक समय था जब यहाँ जीवन था—खेत, मेले, और बच्चों की किलकारियाँ। अब हर कोने…

    read more

  • छत की मोगरी

    छत की मोगरी

    आयुषी राठौर भाग 1: आवाज़ों के बीच “धड़-धड़-धड़-धड़।” नवीन त्रिपाठी की सुबह की पढ़ाई का राग एक बार फिर उस मोगरी की थाप से बिगड़ गया। उसने ज़ोर से किताब बंद की, चश्मा उतारा, और आंखें मिचमिचाते हुए सामने वाली छत की ओर देखा। वहीं थी — वही लड़की — नीली सलवार-कुर्ता, बाल झटका हुआ,…

    read more