Hindi

  • दियों के बीच मोहब्बत

    दियों के बीच मोहब्बत

    सात साल के बाद भारत की ज़मीन पर पैर रखते ही अनुपम को एक अजीब-सी गरमाहट महसूस हुई, जैसे किसी पुराने स्वेटर को फिर से पहन लिया हो। एयरपोर्ट से निकलते ही चिलचिलाती धूप और खस्ता ट्रैफिक ने उसे भले ही हल्का सा चौंका दिया हो, पर दिमाग कहीं और था — उन गलियों की…

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  • विकृति की छाया

    विकृति की छाया

    आकाश देशमुख  “नई शुरुआत” पृथ्वी, साल 2085। जलवायु परिवर्तन ने संसार को नष्ट करने की कगार पर ला खड़ा किया था। ग्लेशियरों के पिघलने और महासागरों के बढ़ते जल स्तर ने समस्त मानवता को एक अपार संकट में डाल दिया था। कुछ ही सालों में, बड़े-बड़े शहरों में जीवन जीना लगभग असंभव हो चुका था।…

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  • बीबी का मक़बरा: अधूरी मोहब्बत का ख़ून

    बीबी का मक़बरा: अधूरी मोहब्बत का ख़ून

    रागिनी शुक्ला १ औरंगाबाद की सर्द रात की हवा में एक अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी, जैसे इतिहास की परतों में दबी कोई अनकही दास्तान सांस रोके खड़ी हो। बीबी का मक़बरा अपने जमे हुए सौंदर्य के साथ अंधेरे में भी चमक रहा था, उसकी संगमरमर की दीवारों पर चाँदनी बिखरी हुई थी और…

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  • तेरे नाम की एक शाम

    तेरे नाम की एक शाम

    समीरा खान पहला भाग: वो शाम कुछ अलग थी दिल्ली की शामों में एक अजीब सी बात होती है। भीड़भाड़, ट्रैफिक, और गाड़ियों के हॉर्न के शोर के बीच भी कभी-कभी एक ऐसी ख़ामोशी उतरती है जो सीधे दिल तक पहुँचती है। ऐसा लगता है जैसे शहर थम सा गया हो, बस एक धीमा संगीत…

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  • दिलचस्प दफ़्तर

    दिलचस्प दफ़्तर

    विशाल कुमार बड़ा कागज संकट ऑफिस के माहौल में एक हलचल थी। Hopeful Hearts की छोटी सी टीम किसी न किसी वजह से हमेशा उधड़ी रहती थी। आज ऑफिस का एक नया दिन था, और जैसे ही अर्विंद, ऑफिस के मैनेजर, ने दरवाजा खोला, उसे एक चिठ्ठी मिली जो सीधे विनोद सर के केबिन से…

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  • नकाबपोश राघव अग्रवाल

    नकाबपोश राघव अग्रवाल

    राघव अग्रवाल अध्याय 1: पहला पर्दा गिरा मुंबई के कोलाबा स्थित प्रसिद्ध रंगमंच “रंगदीप” की दीवारों पर हल्की सी सीलन की परत थी, पर भीतर माहौल हमेशा जीवंत और रचनाशील रहता था। उस शाम भी, मंच पर एक नया नाटक “अंधेरे के चेहरे” का अभ्यास चल रहा था। लेकिन इस बार, मंच पर सिर्फ अभिनय नहीं,…

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  • पूर्णिमा की रात

    पूर्णिमा की रात

    श्रुति चतुर्वेदी अध्याय १: चाँदनी और लोककथा कुमाऊँ की पहाड़ियों में बसा वह छोटा सा गाँव अपनी ठंडी हवाओं, चीड़ के ऊँचे-ऊँचे वृक्षों और सदियों पुरानी लोककथाओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। बरसों से बुजुर्गों की कहानियों में एक रहस्य जिंदा था—पूर्णिमा की रात एक सफेद साड़ी में लिपटी औरत की परछाईं तालाब की…

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  • कॉफी मशीन के पास मोहब्बत

    कॉफी मशीन के पास मोहब्बत

    कविता अग्रवाल भाग 1: कॉफी मशीन के पास ऑफिस की सातवीं मंज़िल पर हर सुबह नौ बजकर पैंतालीस मिनट पर कॉफी मशीन के पास एक तयशुदा सी हलचल होती थी। मशीन की टन-टन की आवाज़, प्लास्टिक के कपों की हल्की खनखनाहट और थोड़ी-सी सुबह की थकान लिए लोग—इन सबके बीच आकांक्षा का आना किसी नियम…

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  • किश्तों में शादी

    किश्तों में शादी

    नरेश चतुर्वेदी पहला भाग: उधारी के सूट से शुरू हुआ रोमांस रमेश कुमार चौबे एक साधारण लेकिन महत्वाकांक्षी युवक था, जो इलाहाबाद की एक पुरानी किराये की कोठी में रहता था जहाँ दीवारों से पपड़ी गिरती थी और छत से कबूतर। लेकिन उसके सपनों की कोई सीमा नहीं थी। वह हर इतवार को बालों में…

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  • खेत में खून

    खेत में खून

    प्रिया त्रिपाठी सुबह का वक्त था और गाँव में धुंध की हल्की परत अब भी खेतों के ऊपर तैर रही थी। प्रिया यादव, जो छुट्टियों में अपने घर लौटी थी, माँ के कहने पर मंदिर जा रही थी। रास्ते में उसे कुछ गड़बड़ महसूस हुई—गाँव के सबसे बड़े सरसों के खेत की मेड़ पर कुछ…

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  • बनारस की गलियों में प्यार

    बनारस की गलियों में प्यार

    विशाल सुरि गंगा की लहरों में आरण, दिल्ली का एक युवा लेखक, हमेशा से ही अपनी ज़िंदगी में कुछ नया और अनोखा ढूंढ़ने की कोशिश करता रहा था। उसका जीवन किताबों और कहानियों के बीच बसा था, लेकिन वह खुद कभी अपनी कहानी नहीं लिख पाया था। अपनी अगली किताब के लिए प्रेरणा की तलाश…

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  • धूप के टुकड़े

    धूप के टुकड़े

    अन्वेषा सिन्हा १ निहारिका की दुनिया बहुत सीमित थी—एक पुराना, ऊँची छतওয়ाला कमरा जिसमें मोटे-मोटे परदे हर खिड़की को ढँके रखते थे, और दीवारों पर हल्की नमी और एक अधूरी राग की गूँज बसी रहती थी। दिल्ली के बांग्ला साहिब रोड के पुराने इलाके में स्थित उस मकान की छत पर कभी-कभी धूप उतनी बेधड़क…

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