प्रेम कहानियाँ

  • आख़िरी ट्रेन टू बनारस

    आख़िरी ट्रेन टू बनारस

    सौरभ पांडेय भाग 1 – बनारस की रात बनारस स्टेशन की पुरानी घड़ी रात के ग्यारह बजकर पैंतीस मिनट दिखा रही थी और प्लेटफ़ॉर्म पर गाड़ियों की आवाजाही थम-सी गई थी, आख़िरी ट्रेन के इंतज़ार में कुछ बचे-खुचे यात्री धीरे-धीरे अपनी चादरें समेट रहे थे, कोई थैले से समोसा निकालकर खा रहा था, तो कोई…

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  • दुपट्टा और स्टेथोस्कोप

    दुपट्टा और स्टेथोस्कोप

    अन्वी शर्मा १ लखनऊ मेडिकल कॉलेज की सुबह हमेशा अलग होती थी—कभी नीले आसमान में सूरज की तेज़ धूप सीधी इमारतों की सफ़ेद दीवारों पर पड़कर चमक उठती, तो कभी बरामदों में टंगे नीले-हरे कोट और सफ़ेद लैब कोट हवा में झूलते रहते। उस सुबह कैंपस में एक अलग ही हलचल थी, क्योंकि नए बैच…

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  • मोबाइल का मिस्ड कॉल

    मोबाइल का मिस्ड कॉल

    आरव मेहरा भाग 1 — अनजान आवाज़ उस रात दिल्ली की हवा में नमी थी और मेरी खिड़की पर महीन बारिश टपक रही थी। मैं लैपटॉप बंद करके बिस्तर पर गिरा ही था कि फोन बज उठा—एक नंबर जो पहले कभी नहीं देखा। मैंने उठाया, “हेलो?” दूसरी तरफ एक गहरी साँस, फिर धीमी आवाज़, “सॉरी……

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  • आख़िरी पन्ना

    आख़िरी पन्ना

    समीरा चतुर्वेदी १ काव्या के लिए किताबों की दुकान किसी मंदिर से कम नहीं थी। हर शनिवार दोपहर वह अपने बैग में एक नोटबुक और पेन रखकर मेट्रो से सीधे कनॉट प्लेस की उस संकरी गली में उतरती, जहाँ लकड़ी की अलमारियों और पुराने काग़ज़ की गंध से भरी वह छोटी-सी दुकान थी। बाहर से…

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  • चाँदनी चौक की मोहब्बत

    चाँदनी चौक की मोहब्बत

    आरव सक्सेना भाग 1 : भीड़ के बीच पहली नज़र पुरानी दिल्ली का दिल है चाँदनी चौक। यहाँ की गलियाँ इतनी तंग हैं कि दो साइकिलें साथ निकलें तो लगता है जैसे दीवारें कानाफूसी कर रही हों। सुबह का वक़्त था। सूरज की सुनहरी रोशनी लाल क़िले की बुर्ज़ों से उतरकर हौज़ क़ाज़ी की तरफ़…

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  • तेरे नाम की ख़ामोशी

    तेरे नाम की ख़ामोशी

    स्मृति चौहान भाग 1 – मुलाक़ात दिल्ली की उस ठंडी सुबह में हवा में हल्की धुंध घुली थी। कनॉट प्लेस की गोलाई पर कॉफ़ी शॉप्स की हलचल धीरे-धीरे बढ़ रही थी। भीड़ के बीच भी आरव को सब कुछ फीका लग रहा था। वह अपने लैपटॉप बैग को कंधे पर टाँगे एक पुरानी किताब की…

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  • कच्छ की चांदनी

    कच्छ की चांदनी

    अनुपमा राजपूत १ दिल्ली की ठंडी, धुंधभरी सुबह में जब हवाई जहाज़ ने उड़ान भरी, तो समीर राठौड़ के भीतर एक अजीब-सी बेचैनी थी—कुछ वैसी, जैसी किसी पुराने दोस्त से मिलने से पहले महसूस होती है, भले ही वो दोस्त कभी सच में मिला न हो। ट्रैवल ब्लॉगिंग उसके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक…

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  • बारिश की महक

    बारिश की महक

    १ मुंबई की हलचल भरी सुबह में, जब अरब क्रिएटिव एजेंसी की 12वीं मंज़िल पर धूप कांच की दीवारों से छनकर बोर्डरूम में गिर रही थी, तभी नए कैंपेन की मीटिंग शुरू हुई। एजेंसी का यह सबसे बड़ा प्रोजेक्ट था—एक इंटरनेशनल ब्रांड का भारत में पहला बड़ा लॉन्च—और हर कोई इस मीटिंग में अपनी चमक…

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  • रात का दूसरा किनारा

    रात का दूसरा किनारा

    आर्या मेहता पुराने शहर की गलियों में नवंबर की धुंध ऐसे उतरती थी, जैसे कोई धीमी धुन दीवारों पर टिक-टिक करती हो। शाम के पाँच बजते ही सफ़ेद रोशनी वाले बल्बों के चारों ओर पतंगों की नन्ही परिक्रमा शुरू हो जाती, और मिट्टी से आती सोंधी गंध लोगों के चेहरों पर अनजाने-से भाव रच देती।…

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  • रात की रौशनी में तुम

    रात की रौशनी में तुम

    तृषा तनेजा १ धुंध से भरी उस सुबह में, पहाड़ों का रंग नीला नहीं था—वह कुछ धुंधला, कुछ राखी था, जैसे नींद से आधे जागे किसी ख्वाब के किनारे खड़े हों। चित्रधारा नामक इस छोटे से पहाड़ी कस्बे में पहली बार कदम रखते ही दक्ष सहगल को लगा मानो किसी भूली हुई याद की गलियों…

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  • ख्वाबों के उस पार

    ख्वाबों के उस पार

    अदिति राठी भाग 1: मुलाक़ात पन्ना की सर्दी में धूप एक वरदान जैसी लगती थी। स्कूल की छत पर बिछी टाट की चटाइयों पर बच्चे बैठकर चित्र बना रहे थे—सूरज, पेड़, झोपड़ी, और किसी कोने में एक मंदिर की घंटियां। रेवती चौहान बीच में खड़ी, बच्चों की तस्वीरों पर झुकती, तारीफ़ करती और कभी-कभी पेंसिल…

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  • एक रूम, दो दिल

    एक रूम, दो दिल

    दिव्या कपूर १ बैंगलोर की हल्की बारिश वाली उस सुबह रीमा सेन ने एक हाथ में छाता और दूसरे हाथ में एक भारी बैग थामे ऑटो से उतरते ही चैन की सांस ली। कोलकाता से आए हुए उसे कुछ ही दिन हुए थे, लेकिन इस शहर की सड़कों और ट्रैफिक ने पहले ही उसे बता…

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