क्राइम कहानियाँ
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काली डायरी
श्रुति चतुर्वेदी १ बनारस की संकरी गलियों में सुबह का उजाला अक्सर धुएँ और धूल में घुला होता है, लेकिन उस दिन ठंड के कुहासे में जो चीज़ सबसे अलग दिखी, वो था—शव। सोनारपुरा की एक टूटी-फूटी हवेली के पीछे कूड़े के ढेर पर मिली थी एक लाश—एक अधेड़ उम्र के आदमी की, जिसकी आँखें…
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क़ातिल की आहट
किरण मलिक १ दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक इलाके, कनॉट प्लेस के एक शाही अपार्टमेंट में एक सनसनीखेज हत्या हुई। ये हत्या उस इलाके के मशहूर और सफल कॉर्पोरेट लॉयर, नेहा सूद की थी। रविवार की सुबह, उनके अपार्टमेंट से एक अजीब गंध उठी, जो कि पड़ोसियों को खींच लाई। जब पुलिस और फायरब्रिगेड की टीम…
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सियाही का खून
माधुरि वर्मा १ लखनऊ की हल्की बारिश में भीगता शहर उस शाम असहज सन्नाटे में डूबा था, जब नेहा द्विवेदी की लाश उसके छोटे से किराए के फ्लैट में मिली। दीवार पर एक अधजला अगरबत्ती होल्डर अब भी धुआँ छोड़ रहा था और खिड़की से आती हल्की हवा कागज़ के पन्नों को सरसराहट के साथ…
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१३ वीं मंज़िल
सम्वित शर्मा अध्याय १: एक और गिरावट बारिश की एक भारी रात थी, जब मुंबई की गगनचुंबी इमारत ‘ओशन व्यू हाइट्स’ के नीचे पुलिस की गाड़ियाँ जमा हो गईं। चारों तरफ नीली-लाल बत्तियों की झिलमिलाहट में भीगते हुए कुछ लोग भीड़ बनाकर खड़े थे, और बीच में एक पीले प्लास्टिक की शीट से ढका शव—एक…
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रेड लिपस्टिक और एक राज़
श्रुति चौहान भाग 1: चेहरा जो पहचाना सा था “नेहा, अगला क्लाइंट आया है,” रिया की असिस्टेंट ने धीरे से कहा। नेहा माथे पर हल्की लटों को पीछे सरकाते हुए ब्रश को मेज पर रखा। बड़ी स्क्रीन पर चेहरा फोकस करते-করते वो थक चुकी थी, लेकिन हर दिन की तरह, आज भी मेकअप उसका ध्यान…
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सफेद कोट का खून
राहुल भार्गव अध्याय 1: मौत ऑपरेशन थिएटर में सुबह के सात बजे का वक्त था, जब शहर के मशहूर नवरत्न मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल की दीवारें अपने अंदर एक गहरा रहस्य समेटे खामोश खड़ी थीं। अस्पताल की कांच की दीवारों से धूप की हल्की किरणें भीतर झांक रही थीं, लेकिन उनकी चमक अस्पताल के स्टाफ की घबराहट…
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अधूरी गवाही
नीरजा राजन अध्याय 1: मौत की खबर लखनऊ की जनवरी की उस ठंडी सुबह में सूरज की किरनें भी किसी अनकहे संकोच के साथ ज़मीन पर उतर रही थीं, जैसे उन्हें भी शहर की हवा में पसरे भारीपन का अंदाज़ा हो। हज़रतगंज के उस पॉश अपार्टमेंट “रॉयल हाइट्स” की चौथी मंज़िल पर हलचल मच चुकी…
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मौन गवाह
नितीन द्विवेदी १ प्रयागराज की सर्द सुबह थी। कुहासा गंगा किनारे के घाटों पर पसरा हुआ था। पुराने शहर के मोहल्ले में एक वीरान हवेली खामोशी ओढ़े खड़ी थी—’प्रकाश निवास’, जहाँ न्यायमूर्ति वेद प्रकाश अकेले रहते थे। बाहर एक नीली रंग की एंबेसेडर कार धूल से ढकी हुई थी, मानो वर्षों से चली नहीं हो।…
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साया: मुम्बई के अंधेरे का चेहरा
राहुल शुक्ला भाग 1: धारावी का नया राजा धारावी की तंग गलियाँ उस रात कुछ ज्यादा ही चुप थीं। हवा में बारूद की गंध घुली थी और पुलिस की सायरन की आवाज़ दूर से गूंज रही थी। साया — मुम्बई अंडरवर्ल्ड का एक नाम, जिसे सुनते ही लोगों के चेहरे पर पसीना छलक आता था…












