क्राइम कहानियाँ

  • नीले दरवाज़े के पीछे

    नीले दरवाज़े के पीछे

    अन्वेष चौगुले वह जो नहीं दिखता पांडिचेरी की गलियाँ सुबह की रोशनी में सोने सी चमक रही थीं। समुद्र की ठंडी हवा हर नुक्कड़ पर बसी थी, लेकिन संतोष नगर की एक गली में आज कुछ अलग था—कुछ असहज, कुछ ऐसा जो हवा में भारीपन भर रहा था। उस गली के आख़िरी छोर पर एक…

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  • तानपूरा और ताबूत

    तानपूरा और ताबूत

    विनीत त्रिपाठी बनारस की रातें हमेशा से रहस्यमयी रही हैं, मानो इस शहर की गलियों, घाटों और हवाओं में कोई अदृश्य कहानी हर रात जन्म लेती हो। गंगा का किनारा, जहाँ दिन में हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना में लीन रहते थे, रात होते ही किसी प्राचीन ग्रंथ की तरह रहस्य में डूब जाता था। वहीं पर…

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  • सन्नाटे का रहस्य

    सन्नाटे का रहस्य

    निशांत परांजपे भाग 1 रेल की सीटी की आवाज़, कुछ पुराने डिब्बों का कराहता हुआ शोर और उस पर हल्की बूंदाबांदी—आरव सैनी जैसे ही इस पुराने स्टेशन पर उतरा, उसे कुछ अजीब सा एहसास हुआ। वो पुलिस इंस्पेक्टर था, लेकिन इस बार ड्यूटी पर नहीं। छुट्टी पर आया था, खुद को थोड़े दिन के लिए…

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  • मायानगरी के साए

    मायानगरी के साए

    अर्जुन वर्मा भाग 1 मुंबई की रातों में कुछ अलग ही बात होती है। दिनभर की चकाचौंध के बाद जब समंदर की लहरें भी थककर किनारे से लिपटती हैं, तब शहर के असली चेहरे बाहर निकलते हैं। शोभा डे की पन्नों से परे, फिल्मों के पर्दे से पीछे — वहाँ एक और मुंबई है। काली,…

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  • धुएँ का रहस्य

    धुएँ का रहस्य

    राघवेंद्र मिश्रा १ रात के बारह बजे थे। शहर की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ था। लेकिन उस सन्नाटे को चीरती हुई हवेली नंबर २१ से एक अजीब सी आवाज़ आ रही थी—कभी दरवाज़े के चरमराने की, तो कभी किसी के कराहने की। यह हवेली कभी मिश्रा परिवार की शान हुआ करती थी, लेकिन अब…

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  • अपराध की छाया

    अपराध की छाया

    रवि शर्मा 1 शहर के बाहरी इलाके में एक वीरान मकान था, जिसके चारों तरफ कंटीली झाड़ियों का घेरा था। लोग कहते थे कि वहां रात में अजीब आवाजें सुनाई देती हैं। किसी ने बताया था कि सालों पहले वहां एक कत्ल हुआ था और वो मकान तब से वीरान पड़ा था। इंस्पेक्टर राघवन को…

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