क्राइम कहानियाँ

  • खून का सौदा

    खून का सौदा

    राहुल देव मुंबई की बारिश अक्सर शहर को धो देती थी, पर उस रात की बारिश ने मानो अपराध की गंध को और गाढ़ा कर दिया था। लोअर परेल की एक संकरी गली में पीली बत्तियों के नीचे पानी चमक रहा था। उसी अंधेरे में एक आदमी दौड़ रहा था—काले रेनकोट में, हाथ में किसी…

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  • छठ घाट का खून

    छठ घाट का खून

    अनुभव कुमार १ गंगा नदी के तट पर पटना का छठ घाट उस शाम अलौकिक सौंदर्य से भरा हुआ था। सूरज धीरे-धीरे क्षितिज में ढल रहा था और उसकी सुनहरी किरणें गंगा के जल पर फैलकर पूरे वातावरण को एक अद्भुत आभा प्रदान कर रही थीं। हज़ारों श्रद्धालु, महिलाएँ रंग-बिरंगे साड़ी में, पुरुष पारंपरिक धोती-कुर्ता…

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  • काशी की अधूरी लाशें

    काशी की अधूरी लाशें

    अभय वशिष्ठ अध्याय १ वाराणसी की सुबहें अक्सर गंगा आरती की गूंज, शंखनाद और मंत्रोच्चार से जीवंत हो उठती हैं, लेकिन इन दिनों घाटों पर एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ था। गंगा के किनारे बहती ठंडी हवा भी अब लोगों के दिलों को सुकून नहीं दे रही थी, क्योंकि लगातार कुछ दिनों से घाटों…

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  • गुमशुदा दुल्हन

    गुमशुदा दुल्हन

    अमृता वीर १ पंजाब का छोटा-सा कस्बा उस दिन रोशनी और संगीत से जगमगा रहा था। गलियों में बिछी झालरें और घर-घर से आती ढोलक की थाप पूरे माहौल को उत्सवमय बना रही थी। सर्दियों की हल्की ठंडी हवा में पकवानों की खुशबू, शहनाई की गूँज और औरतों की गिद्दा-भांगड़ा की आवाज़ें मिलकर एक रंगीन…

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  • शिकारी और शिकार

    शिकारी और शिकार

    आकाश गुप्ता १ भोपाल की रात उस रोज़ असामान्य रूप से सन्नाटेदार थी। बरसात अभी-अभी थमी थी और सड़कों पर जगह-जगह पानी जमा था, स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी उस पानी में प्रतिबिंबित हो रही थी। पुराने भोपाल की तंग गलियों से लेकर नए शहर की चौड़ी सड़कों तक हर जगह नमी और ठंडक फैली…

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  • ठाकुर का आख़िरी भोज

    ठाकुर का आख़िरी भोज

    १ अगस्त की उमस भरी दोपहर थी, जब हवेली के पुराने दरवाज़े पर पीतल की घंटी तीन बार बजी और नौकरों ने बड़े हॉल में गूँजती आवाज़ में ऐलान किया—“ठाकुर साहब का फरमान! इस बरस सालाना भोज का आयोजन पूरे ठाठ-बाट से होगा।” यह खबर जैसे ही हवेली के भीतर पहुँची, आँगन में बैठी ठाकुराइन…

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  • पुल के नीचे

    पुल के नीचे

    दिव्या चावला १ जून की एक नमी से भरी, भारी-सी रात थी। मुंबई की बारिश अपनी पूरी ताक़त के साथ बरस रही थी, सड़कें पानी से भर चुकी थीं और कहीं-कहीं रेल की पटरियों के नीचे पानी बहने की आवाज़ एक अजीब-सी लय बना रही थी। शहर के पुराने हिस्से में, लोहे का वह पुल…

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  • विवेक सरीन

    विवेक सरीन

    कालसूत्र भाग 1: वरसा का खून मुंबई की उस रात में समुद्र शांत नहीं था। लहरों का शोर सड़क की सन्नाटे को काटता जा रहा था, और बंदरगाह की ओर दौड़ती एक काली SUV की हेडलाइट्स किसी अजाने फैसले की गवाही दे रही थीं। गाड़ी की पिछली सीट पर बैठा था आदित्य वरसा — वरसा…

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  • साया

    साया

    १ शाम के साढ़े नौ बज रहे थे। शहर के सबसे पॉश इलाके, वसंत विहार के बंगला नंबर 47 में एक अजीब सी शांति फैली हुई थी। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी, और भीतर की दुनिया किसी रहस्य को अपने अंदर समेटे चुप थी। इस घर के मालिक, विवेक मल्होत्रा, एक नामचीन उद्योगपति थे…

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  • दोपहर का शिकार

    दोपहर का शिकार

    रौशन त्रिपाठी १ दोपहर का सूरज जयपुर की हवेलीनुमा गलियों को चटक सोने से भर रहा था। बाहर की दुनिया में चहल-पहल थी, लेकिन एक आलीशान अपार्टमेंट के अंदर, नैना वर्धन की आँखों में एक अलग ही हलचल थी। उसके लंबे भूरे बालों में हल्की लहर थी, आँखों में हल्का काजल, और होंठों पर वह…

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  • खामोश गवाह

    खामोश गवाह

    अनिरुद्ध राजन मिश्रा वाराणसी की तंग गलियों में वो रात कुछ ज्यादा ही खामोश थी, जैसे कोई बड़ा तूफान पहले ही सब उजाड़ चुका हो। इंस्पेक्टर अयान शुक्ला की जीप जब कोतवाली इलाके की उस मोड़ पर पहुँची, तो चारों तरफ भीड़ जमा हो चुकी थी। लाल-नीली बत्तियों की चमक पुलिस की असहज उपस्थिति दर्ज…

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  • खून की होली

    खून की होली

    अशोक वर्मा एक रामपुर चकिया की संकरी गलियाँ उस दिन रंगों से भरी हुई थीं। हर घर की छत पर अबीर उड़ रहा था, गुलाल की महक और ढोल की थाप से पूरा गाँव झूम रहा था। ठेठ भोजपुरी गानों पर बच्चे-बूढ़े, औरत-मर्द सब अपनी-अपनी झिझकें छोड़ चुके थे। लेकिन उस जश्न के भीतर एक…

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