प्रेतकथा
-
बरगद का वादा
१ गाँव से ज़रा हटकर, कच्ची पगडंडी के किनारे, खेतों और बंजर ज़मीन के बीच खड़ा था एक विशाल बरगद का पेड़। उसकी जटाएँ धरती से लटककर साँपों की तरह रेंगती थीं और उसका फैलाव इतना था कि बरसात के दिनों में आधा गाँव उसकी छाँव में आ सकता था। लेकिन यह छाँव गाँववालों के…
-
नासिक का शिकारी
आदित्य राणे जंगल की चेतावनी नासिक की सुबहें अंगूर के बाग़ों और पहाड़ियों की धुंध से शुरू होती हैं। सूरज की पहली किरणें जब त्र्यंबक के जंगलों पर गिरतीं, तो पूरा इलाका सुनहरी चादर से ढक जाता। लेकिन उसी सुंदरता के भीतर छुपा था एक ऐसा रहस्य, जिसके बारे में गाँव के लोग फुसफुसाते थे—सुपारीवान…
-
कालीन की नज़रों वाला घर
१ कर्नाटक के एक पुराने शहर में अर्जुन वर्मा और उनकी पत्नी नैना वर्मा अपने बेटे रोहन के साथ नए जीवन की शुरुआत करने के लिए एक पुराना घर खरीदने का निर्णय लेते हैं। अर्जुन, जो इतिहास के प्रोफेसर हैं, और नैना, जो एक फ्रीलांस आर्टिस्ट हैं, दोनों ही शहर के शोरगुल से दूर, शांति…
-
पाँचवां कमरा
कृष्णा तामसी १ चारों तरफ बर्फ की सफेद चादरें बिछी थीं और हरे देवदार के पेड़ जैसे किसी पुराने रहस्य को छिपाए खड़े थे। आरव मल्होत्रा की जीप धीरे-धीरे घने कोहरे को चीरती हुई हिमाचल के दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजर रही थी। मोबाइल नेटवर्क कब का गायब हो चुका था और जीपीएस भी मानो…
-
आख़िरी अपडेट
दिल्ली के शाहपुर जाट इलाके की पतली गलियों में, एक पुरानी इमारत की तीसरी मंज़िल पर अवनि शर्मा ने हाल ही में किराए पर एक फ्लैट लिया था। मकान मालिक ने कहा था, “थोड़ा पुराना है, मगर शांत इलाका है।” अवनि को यही चाहिए था—शांति। एकाकी ज़िंदगी, कॉफी मग में भाप लेती शामें, लैपटॉप पर…
-
टेप रिकॉर्डर
विराज जोशी १ ऋत्विक घोषाल एक ऐसे लेखक थे जिनकी आँखों में नींद नहीं, बल्कि पुराने समय की छवियाँ तैरती थीं। दिल्ली के करोल बाग के एक पुराने अपार्टमेंट की चौथी मंज़िल पर उनका छोटा सा कमरा था—दीवारें जर्जर, खिड़की से झांकती धूल, और हर कोने में बिखरे किताबों के ढेर जिनमें से ज़्यादातर रेडियो…
-
कंचनपुर की पिशाचनी
शैलेश पटनायक १ बिहार के सुपौल जिले के पूर्वी छोर पर बसा था कंचनपुर गांव — खेतों और तालाबों के बीच झूमता हुआ एक शांत पर रहस्यमय संसार। दोपहर की गर्मी ढल रही थी जब नीलोत्पल मिश्रा और उसकी नवविवाहिता पत्नी संध्या, गांव की कच्ची सड़कों से गुजरते हुए अपने पुश्तैनी मकान के सामने पहुंचे।…
-
गढ़वाल का मेहमान
संजीव रावत १ गढ़वाल की घाटियों में शाम जल्दी उतरती है। सूरज के ढलते ही पहाड़ियों की परछाइयाँ लंबी होकर पूरी घाटी को निगल जाती हैं। नीरज रावत, अपने कंधों पर भारी बैकपैक लटकाए, एक संकरी बर्फ़ीली पगडंडी पर बढ़ रहा था। उसका मफलर बर्फ की सफ़ेद चादर में भीग चुका था और सांसें अब…
-
पैतालगाँव की पुकार
सौरभ ठाकुर १ छत्तीसगढ़ की पहाड़ियों और जंगलों के बीच बसे अनछुए रास्तों पर अनिरुद्ध घोष की जीप धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। मौसम अजीब रूप से ठहरा हुआ था — न हवा, न चिड़ियों की चहचहाहट, बस पेड़ों की लंबी छायाएँ और कभी-कभी टायरों के नीचे कुचले पत्तों की आवाज़। अनिरुद्ध, जो कोलकाता का…
-
हुसैनाबाद हवेली का रहस्य
प्रताप श्रीवास्तव १ लखनऊ विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी की सबसे ऊपरी मंज़िल पर, जहाँ किताबों पर धूल की मोटी परत जम चुकी थी, वहीं एक कोने में बैठा था इतिहास विभाग का शोधार्थी विवेक मिश्रा। बाहर बारिश की बूँदें खिड़की की काँच पर थपकी दे रही थीं, लेकिन विवेक की आंखें जमी थीं उस पुराने नक्शे…
-
पिंजरे की लड़की
तृषा मिश्रा १ दिल्ली की भीड़भाड़ और धूल-धक्कड़ भरी गलियों से निकलकर जब डॉ. वेदिका माथुर उत्तर प्रदेश के उस सुदूर गाँव ‘बड़ागाँव’ पहुँची, तो सुबह के आठ बजे थे। बस स्टैंड पर बस ने झटके से ब्रेक लगाया था और साथ बैठे ग्रामीणों की बातचीत एक पल को थम गई थी। हाथ में जंग…
-
अंधेरे की पुकार
आलोक पाण्डेय १ राजस्थान की तपती हुई धरती पर फैला हुआ था कर्णपुरा गाँव—एक ऐसा स्थान जहाँ गर्म हवाएँ दिन में साँय-साँय करती थीं और रात होते ही सब कुछ जैसे ठहर जाता था। चारों ओर बंजर ज़मीन, सूखे पेड़ों की छाँह, और रेत में गहराती चुप्पी। जुलाई की उस दोपहर में, जब सूरज अपनी…












