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देव दीपावली बनारस
राकेश त्रिपाठी भाग 1 – अस्सी घाट की पहली सुबह सुबह के पाँच बज रहे थे। नवंबर की हल्की ठंडी हवा में वाराणसी शहर अभी नींद से पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अस्सी घाट पर चहल-पहल शुरू हो चुकी थी। मैंने अपने बैग को कंधे पर टाँगा और होटल से बाहर निकलते ही महसूस…
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बनारस की गलियों में प्यार
विशाल सुरि गंगा की लहरों में आरण, दिल्ली का एक युवा लेखक, हमेशा से ही अपनी ज़िंदगी में कुछ नया और अनोखा ढूंढ़ने की कोशिश करता रहा था। उसका जीवन किताबों और कहानियों के बीच बसा था, लेकिन वह खुद कभी अपनी कहानी नहीं लिख पाया था। अपनी अगली किताब के लिए प्रेरणा की तलाश…


