रिश्ते
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साया-ए-इश्क़
निखिल आनंद एपिसोड 1: पहली मुलाक़ात शाम ढल रही थी। शहर की सड़कों पर पीली बत्तियाँ जल चुकी थीं और हवा में नमी का हल्का-सा स्वाद था। किसी पुराने फ़िल्मी गीत की धुन पास के पानवाले की दुकान से छनकर आ रही थी। भीड़ के बीच भी कभी-कभी अकेलापन उतना ही गहरा लगता है जितना…
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गली-गली बनारस
आरव मिश्र पर्व 1: घाटों का सवेरा बनारस की सुबह का कोई मुकाबला नहीं। यह शहर जिस तरह हर दिन की शुरुआत करता है, वैसा और कहीं नहीं होता। जैसे ही पहली किरण गंगा पर गिरती है, शहर की गलियाँ धीरे-धीरे जागने लगती हैं। रात की निस्तब्धता टूटकर धीरे-धीरे जीवन की चहचहाहट में बदल जाती…
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तेरे नाम की ख़ामोशी
स्मृति चौहान भाग 1 – मुलाक़ात दिल्ली की उस ठंडी सुबह में हवा में हल्की धुंध घुली थी। कनॉट प्लेस की गोलाई पर कॉफ़ी शॉप्स की हलचल धीरे-धीरे बढ़ रही थी। भीड़ के बीच भी आरव को सब कुछ फीका लग रहा था। वह अपने लैपटॉप बैग को कंधे पर टाँगे एक पुरानी किताब की…



