भारतीय लोककथा

  • नीले जंगल का साया

    नीले जंगल का साया

    आरव सिंह ठाकुर भाग 1: पहाड़ की पहली चीख धुंध सुबह की खिड़की पर जम चुकी थी जैसे किसी ने रात भर चुपचाप रोते हुए आंसुओं से शीशा धो डाला हो मलाणा घाटी में सूरज का उदय हमेशा देर से होता है लेकिन उस दिन उसकी रौशनी जैसे खुद डर गई थी गांव के ऊपर…

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