ख्वाबों का शहर
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“सपनों की खिड़की”
अदिति राठी भाग 1 – मुलाक़ात दिल्ली की सर्दियों में धूप किसी पुराने कंबल की तरह होती है—पतली, मगर भरोसेमंद। अनाया ने खिड़की पर टंगी धुले हुए कपड़ों की कतार के बीच से झांककर आकाश को देखा और घड़ी पर नज़र डाली। सुबह के आठ बजकर पैंतालीस। नौ बजे की ब्लू लाइन पकड़नी है। उसके…

