आध्यात्मिकहॉरर
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भूतिया तिजोरी
शुभदीप मिश्र वाराणसी स्टेशन की गर्म हवा में अजीब-सी गंध थी—कुछ धूप की, कुछ पुराने लोहे की, और कुछ जैसे समय की। शौर्य व्यास ने अपने ट्रॉली बैग का हत्था कसकर पकड़ा और भीड़ को चीरते हुए बाहर निकला। सालों बाद भारत लौटना उसे उतना अजनबी नहीं लगा, जितना लगा व्यास निवास का नाम सुनते…

