अंधविश्वास

  • कान्हा के काले धागे

    कान्हा के काले धागे

    प्रकाश पांडेय प्रवीर एक छोटे से गाँव गंगावटी में पहुंचा, जहाँ वह अपने जीवन की तकलीफों से बचने के लिए एक नया आरंभ करना चाहता था। अपनी मां की आकस्मिक मृत्यु के बाद, वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था। शहर के शोर-शराबे और हलचल से दूर इस शांत गांव में आने का…

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  • धार्मिक भ्रम

    धार्मिक भ्रम

    विक्रम यादव राजस्थान के एक शांत और ऐतिहासिक मंदिर नगर विश्णुप्रिया की गलियों में सुबह की ताजगी फैली हुई थी। देवांश कुमार, एक युवा और ऊर्जावान पत्रकार, अपनी यात्रा की शुरुआत करने के लिए यहाँ आया था। उसे इस बार अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र के लिए एक रिपोर्ट तैयार करने का कार्य सौंपा गया था।…

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  • अंतिम आरती

    अंतिम आरती

    हिमाचल की घाटियों में दिसंबर की रातें कुछ अलग ही किस्म की सन्नाटे से भरी होती हैं। हवा में बर्फ़ की गंध, पेड़ों पर जमीं सफेद चादर, और दूर कहीं से आती घंटियों की हल्की गूंज जैसे समय को रोक देती है। उन्हीं घाटियों में, देवदार के पेड़ों से घिरे एक पहाड़ी ढलान पर खड़ा…

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  • अंधे कुएं की पुकार

    अंधे कुएं की पुकार

    विराज कुलकर्णी १ उत्तर भारत के एक सुदूर गाँव में जब सरकारी जीप धूल उड़ाती हुई दाखिल हुई, तो सूरज अपनी नारंगी किरणें खेतों की मेड़ों पर बिखेर रहा था। गाँव का नाम ‘गहना’ था — और सच में, यह गाँव घने सन्नाटे से ढका हुआ था। डॉ. अदिति वर्मा खिड़की से बाहर झाँकती रही;…

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